बाज़ार जब बराबर चढ़ रहा हो, अधिकांश शेयर नई ऊंचाइयां छू रहे हों, तब ब्रेकआउट ट्रेड करने का सलीका ही सबसे सही व कारगर रणनीति है। लेकिन ब्रेकआउट ट्रेड के कई तरीके हैं। इनमें से एक है फ्लैग-पैटर्न जिसे हमने कल इस्तेमाल किया। इसके अलावा टेक्निकल एनालिसिस में कुछ अन्य तरीके भी हैं जिन पर हम अगले दिनों  चर्चा करेंगे। मगर, इनमें समान पहलू यह है कि ऐसे ट्रेड बड़े रिस्की होते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के तमाम सूचकांक ऐतिहासिक ऊंचाई पर। हर पांच लिस्टेड कंपनी में से चार के शेयर 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर। 20% गिरे हुए शेयरों को हाथ लगाने में भी डर लगता है कि कहीं और न गिर जाएं। अखबार, चैनल व विश्लेषक सभी ‘बुल-रन’ का हल्ला मचाने लगे हैं। रिटेल निवेशक भी अपनी पूंजी लेकर बाज़ार की तरफ दौड़ पड़ा है। लालच के इस दौर में क्या हो ट्रेडिंग रणनीति? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था के हाल पर भले ही धुंधलका छाया हो, कंपनियों के नतीजे उतने अच्छे नहीं आ रहे हों, फिर भी शेयर बाज़ार कुलांचे मारता जा रहा है। निफ्टी और सेंसेक्स रोज़ नई ऊंचाई पकड़ रहे हैं। ऐसे में कंपनियों को चुनने में ज्यादा ही सावधानी बरतनी होगी। दूसरे, हमें अपने निवेशयोग्य धन का 25-35% ही शेयरों और बाकी 65-75% एफडी या बांडों में लगाना चाहिए। अब तथास्तु में पेश है आज एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

कभी आपने गौर किया है कि मनीकंट्रोल जैसी वेबसाइटों या बिजनेस चैनलों पर आनेवाले एनालिस्ट ज्यादातर ऐसे शेयर खरीदने को कहते हैं जो पहले ही काफी चढ़ चुके होते हैं। ऊपर से उनमें बढ़ने की जितनी संभावना होती है, उतना ही गहरा स्टॉप-लॉस लगाने को कहते हैं। मसलन, रैम्को सीमेंट्स को 720 पर 790 के लक्ष्य के साथ खरीदो, जबकि स्टॉप-लॉस 650 का है। यानी, 9.72% बढ़त तो उतना ही फटका! इनसे बचें। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

अब तक जो चुका है, उसका इशारा कुछ और होता है, जबकि हो जाता है कुछ और। फिर भी हम भविष्य की योजना बनाना नहीं छोड़ सकते क्योंकि पूरी तरह भाग्य भरोसे रहना इंसान की मूल फितरत नहीं है। जहां जानवर हमेशा परिस्थितियों के माफिक खुद को ढालते हैं और इंसान भी कुछ हद तक ऐसा करता है, वहीं इंसान हालात को बदलता भी है। यही मानव सभ्यता की विकासगाथा का मूल है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी