शेयर बाज़ार में चल रहे युद्ध में ट्रेडर को शक्ति-संतुलन की बारीक परख के साथ योजना बनाकर उतरना पड़ता है। अन्यथा उसे दो खेमों के बीच में पिसते देर नहीं लगती। सफल ट्रेडर बाज़ार की हर हरकत पर उछलता-गिरता नहीं, बल्कि पूरा धीरज बरतते हुए हिसाब लगाता है, स्टॉक्स चुनता है और गिनता है कि उनके बढ़ने या गिरने की प्रायिकता कितनी है। फिर अपने रिस्क को तौलकर दांव लगाता है। अब लगाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार, दरअसल दो सेनाओं के युद्ध जैसा है। एक सेना भावों को बराबर उठाते जाना चाहती है, जबकि दूसरी सेना भावों को बराबर नीचे ले जाने में लगी रहती है। दोनों में बराबर युद्ध चलता रहता है। कभी एक का पलड़ा भारी तो कभी दूसरे का। कभी-कभी मामला बीच में अटका रहता है। ट्रेडर का कोई खेमा नहीं होता। उसे बाज़ार के संतुलन के हिसाब से कमाने की कला सीखनी पड़ती है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

सूचकांक भले ही नई ऊंचाइयां छूते जा रहे हों। लेकिन पूरे शेयर बाज़ार में जहां हर दिन कुछ शेयर 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर बना लेते हैं, वहीं कुछ शेयर न्यूनतम स्तर पकड़ लेते हैं। मसलन, बीते शुक्रवार को एनएसई में जहां 92 शेयर शिखर पर पहुंच गए, वहीं 40 शेयर साल भर के न्यूनतम स्तर तक जा गिरे। हमें ट्रेडिंग करते हुए इन उठते-गिरते शेयरों पर बारीक नज़र रखनी चाहिए। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

दूध उबलता है दस मिनट तो उफनता है बमुश्किल 10-15 सेकंड। फिर पानी के छींटे मारने या लौ से हटा लेने पर सम जाता है। इसी तरह मानकर चलें कि हमारे शेयर बाज़ार का मौजूदा उफान ज्यादा लंबा नहीं खिंचेगा। अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने सिस्टम में डाले गए अतिरिक्त नोटों को खींचने का फैसला कर लिया है, ब्याज दर भी बढ़ा दी है। तथास्तु में आज एक अच्छी कंपनी जिसके शेयर में ज्यादा उफान नहीं आया है।औरऔर भी