शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाना जानकारियों का खेल है। जिसके पास कंपनी के बारे में जितनी सटीक जानकारी, वो उससे उतना ही ज्यादा फायदा उठा सकता है। मगर, सारा बाज़ार ऐसे नियमों से बांधा गया है कि हर किसी को समान मौका मिल सके। मसलन, कंपनी के बारे में सबसे ज्यादा जानकारी उसके प्रवर्तकों, बैंकरों या उनसे जुड़ी वित्तीय संस्थाओं को होती है। लेकिन ऐसी सूचनाओं पर ट्रेड करना कानूनन गुनाह है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार में आईपीओ की भरमार है। कंपनियां छोटे-बड़े निवेशकों से 1000 करोड़ रुपए जुटा चुकी हैं। आगे 5000 करोड़ रुपए तक जुटा सकती हैं। डीमार्ट के निवेशकों की मौज चल रही है। हो सकता है कि सीडीएसएल में भी ऐसा हो जाए। करीब दस साल पहले 2007-08 में भी ऐसा ही माहौल था। याद करें। रिलायंस पावर की दीवानगी। लेकिन उसके बाद सेंसेक्स व निफ्टी 60% से ज्यादा गिर गए थे। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेड करते वक्त युद्धरत दो सेनाओं को बराबर याद रखें। कमाल यह है कि दोनों ही सेनापतियों के मुख्य हथियार ऐसे मिडकैप और लार्जकैप स्टॉक्स बनते हैं जिन्हें सूचकांकों या खासकर सेंसेक्स व निफ्टी में जगह मिली हुई है। हालांकि स्मॉल-कैप भी उनका ज़रिया बनते हैं। लेकिन बाज़ार की दशा-दिशा में ज्यादा भूमिका न होने के कारण इनको खास तवज्जो नहीं मिलती। हां, ये भगदड़ के शिकार ज़रूर बनते हैं। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में वही ट्रेडर सफल होता है जो सैनिकों जैसे दृढ़ अनुशासन का पालन करता है। एकदम सर्जिकल स्ट्राइक जैसा उसका तरीका होता है। सटीक निशाना चुनकर सही वक्त पर हमला करना और योजना के अनुसार काम पूरा होने पर बाहर निकल लेना। दुर्भाग्य से ज्यादातर ट्रेडर बाज़ार में अनुशासन के बजाय थ्रिल व मौज के लिए सौदे करते हैं। समझते भी नहीं कि गलती कहां की। अंततः भारी नुकसान उठाते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी