वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में अतीत की सीख और वर्तमान की समझ के आधार पर हम भविष्य का सौदा करते हैं। भविष्य कोई नहीं जानता। इसलिए हम अधिकतम यही कर सकते हैं कि न्यूनतम रिस्क में सही बैठने की अधिकतम प्रायिकता वाले सौदे चुनें और अपनी ट्रेडिंग पूंजी बचाकर चलें। इस सोच के साथ सिस्टम ऐसा बनाएं कि  हम उन्नीस पर बीस नहीं तो कम से कम 19.05 तो साबित ही हो जाएं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए सौदे चुनने में दूसरा मदद ही कर सकता है। वह आपके चयन का दायरा बढ़ा सकता है। हर दिन ट्रेड होनेवाली 1500 से ज्यादा कंपनियों में से दो-चार चुनकर आपके लिए पेश कर सकता है। वो घुसने, निकलने और स्टॉप-लॉस की गणना भी कर सकता है। लेकिन उसका चयन आपके सिस्टम पर कितना खरा उतरता है और ट्रेड में घुसने, निकलने व स्टॉप-लॉस का सटीक स्तर आपको ही निकालना चाहिए। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

वैसे तो स्वर्ग या नरक किसी दूसरे लोक नहीं, बल्कि इसी धरती पर होते हैं। लेकिन कहावत है कि बिना खुद मरे स्वर्ग नहीं मिलता। इसी तरह शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाई तब तक नहीं होती, जब तक आप अपना खुद का सिस्टम नहीं विकसित करते। हर किसी का रिस्क प्रोफाइल अलग है और उसे उसी हिसाब से सौदे करने होते हैं। सिद्धांत व व्यवहार का फासला उसे ही पाटना होता है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों में निवेशकों की संख्या जून अंत तक 421.7 लाख के नए रिकॉर्ड पर जा पहुंची। ऐसी स्कीमों में निवेशकों की संख्या का पिछला रिकॉर्ड मार्च 2009 में 411.3 लाख का था। लेकिन तब और अब में बहुत फर्क है। तब बाज़ार ऐतिहासिक तलहटी पर था, जबकि अभी ऐतिहासिक शिखर पर। इसलिए अभी का निवेश ज्यादा लाभदायी नहीं हो सकता। ऐसे में अलग से निवेश ही वाजिब होगा। तथास्तु में निवेशयोग्य मजबूत कंपनी…औरऔर भी