चार्ट पर शेयर भावों के रुख का संभावित बदलाव कैसे पकड़ा जा सकता है? सबसे ताज़ा भाव पर पेंसिल या उंगली रखें और बायीं तरफ वहां तक ले जाएं, जहां से ठीक पिछली बार भाव उठे और गिरे थे। वहां नीचे हैमर और ऊपर रिवर्स हैमर जैसी कैंडल हैं तो उनकी अलग-अलग रेंज खरीद और बिक्री का दायरा बता सकती हैं। स्विंग, मोमेंटम या पोजिशनल ट्रेड के लिए साप्ताहिक चार्ट को पकड़ना चाहिए। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

आखिर भाव कहां रुख बदलते और कहां जाकर पलट सकते हैं? भाव वहां से चढ़ते हैं जहां खरीदने की चाह और मांग ज्यादा होती है, जबकि लोग बेचने को उत्सुक नहीं होते। वहीं, भाव वहां से गिरते हैं जहां ज्यादातर लोग बेचने को तैयार होते हैं, जबकि खरीदनेवाले बेहद कम होते हैं। मूर्ख या रिटेल ट्रेडर गिरे भावों पर बेचते और चढ़े भावों पर खरीदते हैं। समझदार या संस्थाएं इसका उल्टा करती हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

हमें खुद से बड़ा सीधा-सरल पूछना चाहिए कि शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग/निवेश से कैसे फायदा कमाया जाता है। इसका आसान जवाब है कम भाव पर खरीदना और ज्यादा भाव पर बेचना। मगर सवाल उठता है कि हम सस्ते में खरीद कर महंगे भाव पर कैसे बेच सकते हैं? जवाब है ठीक उस मोड़ पर खरीद या बेचकर जहां से शेयरों के भाव रुख बदलते हैं। यहां से उठता है अगला सबसे अहम सवाल। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

प्रायिकता के खेल को समझना इसलिए ज़रूरी है ताकि हम शेयर बाज़ार के रिस्क को ठीक से संभाल सकें। वहीं, चार्ट को समझने का तरीका एकदम सीधा व सरल होना चाहिए। जो लोग ऑसिलेटर, बहुत सारे पैटर्न और दसियों इंडीकेटरों के चक्कर में पड़ते हैं, वे चिल्लाते ज्यादा और कमाते कम हैं। चंद मूविंग औसत, कैंडल की कुछ आकृतियां और आएसआई काफी होते हैं बाजार में अच्छे सौदे पकड़ने के लिए। अब गहते हैं मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में कामयाबी के लिए किसी चमत्कारी मंत्र की तलाश वास्तव में मृग मरीचिका जैसा छलावा है। ऐसा कोई मंत्र है ही नहीं तो कोई कैसे आपको दे सकता है। जो भी ऐसा दावा करता है, वो दरअसल आपकी लालच का फायदा उठाकर किसी न किसी रूप में अपनी जेब भरता है। स्टॉक एक्सचेंजों पर घोषित सूचनाएं और भावों के चार्ट मूलाधार हैं। उन्हें और प्रायिकता के खेल को समझें। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी