जिनके पास सीमित बचत है, जो बस इतना कमाते हैं कि घर-परिवार चला लेने और आकस्मिकता से निपटने का इंतज़ाम कर लेने के बाद सालाना 40-50 हज़ार बचा पाते हैं, उनके लिए वित्तीय सलाहकार रखना संभव नहीं। उन्हें तो खुद ही वित्तीय रूप से साक्षर के साथ-साथ शिक्षित भी बनना पड़ता है। उन्हें बीमा का चक्कर भी समझना पड़ता है और शेयर बाज़ार से लेकर म्यूचुअल फंडों तक की जानकारी रखनी पड़ती है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

जो लोग अपने लिए सर्वोत्तम वित्तीय फैसले करना भलीभांति जानते हैं, वे मनचाही ज़िंदगी जी लेते हैं। वहीं, जो लोग वाजिब वित्तीय फैसले लेना नहीं जानते, उनके सामने सीमित विकल्प होते हैं। वे दरअसल दूसरों द्वारा तय की गई ज़िंदगी जीते हैं। जिनके पास पर्याप्त धन है, वे तो वित्तीय सलाहकार की सेवाएं ले सकते हैं। लेकिन अगर वे भी वित्तीय रूप से शिक्षित नहीं हैं तो सलाहकार उनकी जेब काट सकता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

आगे का पता नहीं। लेकिन फिलहाल अपनी अर्थव्यवस्था की हालत पतली है। जनवरी-मार्च में जीडीपी की वृद्धि दर पांच तिमाही से गिरते-गिरते 6.1% पर आ गई। मई में औद्योगिक उत्पादन मात्र 1.7% बढ़ा है, जबकि साल भर पहले यह 8% बढ़ा था। फिर भी शेयर बाज़ार नए शिखर पर! ऐसे में आंख मूंदकर और लालच में आकर नहीं, बल्कि बहुत समझदारी से निवेश करना होगा। हमने बड़ी मेहनत से छांटी है तथास्तु में एक और निवेशयोग्य कंपनी…औरऔर भी

अक्सर जटिल समस्याओं का समाधान बड़ा सरल होता है। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग भी इसका अपवाद नहीं है। हर व्यापार में धंधे का सूत्र है थोक में खरीदकर रिटेल में बेचना। यही मूलमंत्र है शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग से कमाने का। साथ ही भाव डिमांड और सप्लाई के संतुलन से निर्धारित होते हैं तो इसका भी ध्यान रखना चाहिए। तीसरी बात, डिमांड और सप्लाई का स्तर संस्थाएं तय करती हैं, रिटेल ट्रेडर नहीं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

सिस्टम बनाने के लिए मूल आधार बाज़ार व शेयर का पिछला रिकॉर्ड है। टेक्निकल एनालिसिस जैसे तमाम सिद्धांत इसमें पैठने के लिए निकाले गए हैं। दिक्कत यह है कि जैसे ही कोई सिद्धांत या तरीका आम बनता है तो ट्रेडर की धार कुंद हो जाती है क्योंकि सभी वैसा ही कर रहे होते हैं। मसलन, कल की कामयाब क्वांट रणनीति अब नाकाम हो चुकी है। इसलिए हमें अपनी रणनीति बराबर संवारनी पड़ती है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी