खज़ाना रिजर्व बैंक का, मौज सरकार की
बिमल जालान समिति की रिपोर्ट अगस्त 2019 में स्वीकार की गई। तब रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट 30 जून, 2019 को साल भर पहले के ₹36,17,594 करोड़ से 13.42% बढ़कर ₹41,02,905 करोड़ हो गई थी। पहले के नियम के मुताबिक इसका 6.8% हिस्सा कंटेन्जेंसी फंड या सीआरबी के रूप में रखा गया था। जालान समिति ने इसे 5.5% से 6.5% रखने का सुझाव दिया था। लेकिन शक्तिदास के गवर्नर बन जाने पर रिजर्व बैंक ने इसे 5.5%औरऔर भी
आखिर कैसे बदल दी वैधानिक व्यवस्था!
रिजर्व बैंक आरबीआई एक्ट, 1934 के सेक्शन-47 के तहत रिस्क के लिए सही प्रावधान और उचित लाभांश का फैसला करता है। बिमल जालान समिति ने यह फैसला करने का आधार ही बदल दिया। उसने एक नया आर्थिक पूंजी फ्रेमवर्क (ईसीएफ) बना डाला, जिसमें आर्थिक पूंजी को कंटिन्जेंट रिस्क बफर (सीआरबी) या रीयलाइज्ड इक्विटी और बदलते रहनेवाले वोलैटाइल री-वैल्यूएशन रिजर्व के दो हिस्सों में बाट दिया। उसने तय किया कि कंटिन्जेंट रिस्क बफर (सीआरबी) रिजर्व बैंक की बैलेंसऔरऔर भी
वैधानिक व्यवस्था बदली, तिजोरी खुली!
प्रधानमंत्री के पद पर बैठे नरेंद्र मोदी की निगाहें रिजर्व बैंक के खज़ाने पर गड़ गईं। लेकिन उस पर हाथ साफ करना आसान नहीं था क्योंकि तब तक की वैधानिक व्यवस्थाएं इसकी इजाज़त नहीं देती थीं। उसी तरह जैसे परशुराम के उंगली दिखाने पर लक्ष्मण पलटकर कहते हैं, “इहां कुम्हड़ बतिया कोउ नाहीं, जे तर्जनी देखि मरे जाहीं।” इससे पार पाने के लिए मोदी सरकार ने दिसंबर 2018 में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान कीऔरऔर भी
रिजर्व बैंक से 9.29 लाख करोड़ उगाही
देश में धन के धमनी-तंत्र भारतीय रिजर्व बैंक के खजाने पर मोदी सरकार की वक्री दृष्टि साल 2018 के मध्य में तब पड़ी, जब उसके पहले कार्यकाल के चार साल बीत चुके थे। तब रिजर्व बैंक के गवर्नर लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स के ग्रेजुएट और ऑक्सफोर्ड से लेकर येल यूनिर्विसिटी से एम.फिल व डॉक्टरेट करनेवाले कुशल अर्थशास्त्री ऊर्जित पटेल थे। ऊर्जित पटेल ने नोटबंदी का भी विरोध किया था। लेकिन उनकी एक न चली। 14 सितंबर 2018औरऔर भी






