रिजर्व बैंक प्रजा, दूसरे केंद्रीय बैक राजा!
रिजर्व बैंक पर भले ही केंद्र सरकार का पूरा मालिकाना हो, लेकिन वो कभी उसकी सेहत की चिंता नहीं करती, बल्कि राजा की तरह उससे वसूली करती रहती है। अमेरिका का केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व भी अपना सरप्लस सरकार को देता है, लेकिन राज्यों के सदस्य बैंकों को लाभांश और अतिरिक्त कोष में धन डालने के बाद। वो भी सीधे सरकार को नहीं, बल्कि अमेरिकी कोषागार की आम निधि में। यह निधि भारत के कंसोलिडेटेड फंड जैसीऔरऔर भी
जो टैक्स-मुक्त, उस तक को नहीं बख्शा
रिजर्व बैंक का खजाना देश के लिए इतना पवित्र माना जाता रहा है कि वो भले ही लाखों करोड़ का मुनाफा कमा ले, उस पर एक धेले का भी टैक्स नहीं लगाया जाता। चूंकि रिजर्व बैंक भारत का केंद्रीय बैंक है। इसलिए इसे ध्यान में रखते हुए आरबीआई एक्ट, 1934 के सेक्शन-48 के तहत उसे इनकम टैक्स या किसी तरह के दूसरे टैक्स से पूरी तरह मुक्त रखा गया ताकि उसका वित्तीय स्थायित्व सुनिश्चित किया जा सकेऔरऔर भी
रिजर्व बैंक ने कमाया, सरकार ने उड़ाया
भारतीय रिजर्व बैंक पहले भी कमाता था और अब भी कमाता है। वो अपना सारा खर्च खुद उठाता है। लेकिन उसके खजाने पर आज तक मोदी सरकार जैसा हाथ साफ किसी ने नहीं किया था। वो रुपए को संभालने के लिए बाज़ार में डॉलर बेचता है, उस पर भी कमाता है। मसलन, 2024-25 में उसने 399 अरब डॉलर बेचे, जबकि 2023-24 में 153 अरब डॉलर ही बेचे थे। उसकी कुल आस्तियों में विदेशी मुद्रा 64.4% और भारतऔरऔर भी
सरकार ने कहा झुको, वो हुआ लम्बलेट
वित्त सचिव से रिजर्व बैंक के गवर्नर बने शक्तिकांत दास ने छह साल तक मोदी सरकार के दास की तरह काम किया। 12 दिसंबर 2018 को उनके गवर्नर बनने के बाद से 31 मार्च 2024 तक सरकार ने रिजर्व बैंक के खजाने से ₹6.61 लाख करोड़ साफ कर दिए। 10 दिसंबर 2018 को दास का कार्यकाल खत्म होने के अगले दिन से रिजर्व बैंक का गवर्नर संजय मल्होत्रा को बना दिया गया। मल्होत्रा भी केंद्र सरकार मेंऔरऔर भी
रिजर्व बैंक की माई-बाप बन गई सरकार
देश संस्थाओं से बनता है। संस्थाएं धीरे-धीरे सदियो में बनती हैं और उनके बनने-बनाने में पीढ़ियां खप जाया करती हैं। जो संस्थाओं को सुनियोजित ढंग से तोड़ या कमज़ोर कर रहा हो, वो देश को मजबूत नहीं, खोखला करता है। भारतीय रिजर्व बैंक 1 अप्रैल 1935 को बनी वो संस्था है जो देश के संपूर्ण मौद्रिक व बैंकिंग तंत्र की संचालक ही नही, नियामक भी है। मोदी सरकार ने 11 साल के शासन में इस सस्था कोऔरऔर भी





