कृषि रिसर्च पर खर्च क्यों घटा दिया ताई!
ऐसा नहीं है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एकदम बौडम और महामूर्ख हैं। ऐसा भी नहीं कि देश-विदेश में विशेषज्ञों की कोई कमी है। लेकिन असली समस्या यह है कि सरकार की नीयत में भयंकर खोट है। बजट में कहा गया है कि किसानों की आमदनी बढ़ाने का लक्ष्य उत्पादकता और उद्यमशीलता बढ़ाकर हासिल किया जाएगा। लघु व सीमांत (2.5 एकड़ से पांच एकड़ जोत वाले) किसानों पर खास ध्यान दिया जाएगा। सरकार ने इसके लिए भारत-विस्तारऔरऔर भी
बजट में दी अमेरिकी हितों को तरजीह
हम एक ऐसे दौर में रह रहे हैं, जब हर देशवासी को हमारे राष्ट्रीय हितों को ठीक से जानना व समझना ज़रूरी है। नहीं तो केंद्र की सत्ता में बैठी सरकार कभी भी राष्ट्रीय हितों का नाम लेकर देश को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। बजट में बड़ी मासूमियत से कहा गया कि डेटा केंद्रों में निवेश बढ़ाने और ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत को देखते हुए भारत में डेटा सेंटर की सेवाओं को इस्तेमाल करते हुए दुनियाऔरऔर भी
इन्होंने निजी स्वार्थ को बनाया देशहित!
कितनी विडम्बना है कि इस सरकार को अपने और अपनों के अलावा किसी का स्वार्थ नहीं दिखता। इन्हीं निजी स्वार्थों को वो देश का हित बनाकर प्रोजेक्ट कर रही है। इसका एक छोटा-सा प्रमाण है मुंबई का इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज। इसे फिक्की और सीआईआई जैसे देश के शीर्ष उद्योग संगठनों ने भारत सरकार के सूचना व प्रसारण मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर प्रमोट किया है। इसे देश में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट, गेमिंग वऔरऔर भी
झूठ और प्रपंच की नई मिसाल है बजट!
बजट में एक तरफ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दावा किया कि उनकी सरकार ने एक दशक तक चले सतत व सुधार-उन्मुख प्रयासों से लगभग 25 करोड़ लोगों को बहु-आयामी गरीबी से बाहर निकाल लिया। दूसरी तरफ देश के 81.35 करोड़ गरीबों को महीने में पांच किलो मुफ्त राशन देने की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के लिए बजट प्रावधान ₹2.03 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹2.27 लाख करोड़ कर दिया गया। साथ ही उर्वर भूमि को जहरीली बनाऔरऔर भी






