भारत ही नहीं, अमेरिका में भी भड़के हैं भाव!
इस वक्त भारत ही नही, अमेरिकी शेयर बाज़ार में भी आग लगी हुई है। निफ्टी-50 का पी/ई अनुपात कल 40.03 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिका का डाउ जोन्स सूचकांक इस वक्त 30.82 और S&P-500 सूचकांक 41.17 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। हालांकि फर्क यह है कि अमेरिकी बाज़ार में जहां निवेशकों को 1.94% लाभांश यील्ड मिल रही है, वहीं भारत में लाभांश यील्ड इससे कम 1.09% है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
सस्ता धन, मुनाफे का लोभ, गैर बना बाज़ार!
विदेशी पोर्टफोलियो/संस्थागत निवेशकों (एफपीआई/एफआईआई) का खेल एकदम सीधा-सरल है। वे अपने देश से नगण्य ब्याज पर धन उठाकर भारतीय बाज़ार में लगाते हैं। इस पर उन्हें 5-6% रिटर्न भी मिल जाए तो ब्याज और जोखिम की भरपाई करने के बाद इतना सुरक्षित मुनाफा कमा लेते हैं जो उन्हें विकसित देशों में कभी नहीं मिल सकता। लेकिन अपनी अंतहीन लालच में उन्होंने भारतीय शेयर बाज़ार को भारतीयों की ही पहुंच से बाहर पहुंचा दिया। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
देशी सरकार, भयंकर क्रेज़ विदेशी पूंजी का!
मौजूदा ग्लोबल-दौर में आम भारतीयों के बीच विदेशी वस्तुओं का क्रेज़ खत्म हो गया क्योंकि उनको दुनिया की लेटेस्ट चीजें देश में ही मिल जाती हैं। लेकिन हमारी सरकार में विदेशी पूंजी का भयंकर क्रेज़ है। रिकॉर्ड विदेशी निवेश का ढिंढोरा बराबर पीटती है। पोर्टफोलियो निवेशकों के गंजेड़ी स्वभाव (गंजेड़ी यार किसके, दम लगाके खिसके) पर सवाल उठे तो नियम बना दिया कि कंपनी में 10% से कम तो एफपीआई, ज्यादा तो एफडीआई। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
मुठ्ठी भर रोज़गार, जबकि कमाते ज़बरदस्त
प्रत्यक्ष विदेशी निवेशक भारत के उद्योग-धंधों या व्यापार मे निवेश करते हैं। इस तरह देश में रोज़गार के थोड़े-बहुत अवसर पैदा करते हैं। उनकी कमाई का थोड़ा हिस्सा भारतीयों को भी मिलता है। लेकिन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई/एफआईआई) का मकसद बाहर से डॉलर, यूरो या येन जैसी विदेशी मुद्रा लाकर भारत के ऋण या शेयर बाज़ार से विशुद्ध कमाई करना होता है। उनके भारतीय ऑफिस में मुठ्ठीभर कर्मचारी होते हैं, जबकि कमाई जबरदस्त। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
आस किसान, स्वास्थ्य, उद्यमशीलता की
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने चालू वित्त वर्ष 2020-21 में देश का जीडीपी कितना रह सकता है, इसका पहला अग्रिम अनुमान पेश कर दिया है। उसका कहना है कि मौजूदा मूल्य पर हमारी अर्थव्यवस्था का आकार पिछले साल के 203.40 लाख करोड़ रुपए से घटकर इस बार 194.82 करोड़ रुपए रह सकता है, जबकि बजट अनुमान 224.89 लाख करोड़ रुपए का था। यानी, पिछले साल से 8.58 लाख करोड़ रुपए और इस साल के बजट अनुमान सेऔरऔर भी





