विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाज़ार में साल 2020 में शुद्ध रूप से 1,70,260.39 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड निवेश किया। साल 2019 में उन्होंने 1,01,120.77 करोड़ रुपए, 2017 में 51,252.92 करोड़ रुपए, 2016 में 20,566.18 करोड़ रुपए, 2015 में 17,805.96 करोड़ रुपए और 2014 में 97,055.55 करोड़ रुपए डाले थे। वहीं, साल 2018 में यहां से 33,013.05 करोड़ रुपए निकाले थे। छह साल में 4,25,048.72 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश। आखिर क्यों? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेश का सर्वोत्तम मौका तब होता है जब वो एकदम जमींदोज़ हो। बीते साल 2020 में अप्रैल-मई में ऐसा ही मौका आया था। लेकिन तब कोरोना की मार और कमाई की अनिश्चितता के बीच शेयरों में वही लोग धन लगा सकते थे, जिनके पास इफरात धन था। आम निवेशक हाथ-पेट बांधकर चल रहा था। अब, जब वह थोड़ा निश्चिंत हुआ है तो बाज़ार आसमान पर है। लेकिन कभी-कभी चढ़ा शेयर भी सस्ता होता है।औरऔर भी

ट्रेडर को हमेशा जानते रहने के पीछे पड़ा रहना चाहिए। हवाई नहीं, काम का व्यावहारिक ज्ञान। यह ज्ञान साथ के भरोसेमंद ट्रेडरों से मिल सकता है। इंटरनेट पर देश-विदेश की जानकारियां सहज उपलब्ध हैं। सफल ट्रेडरों का अनुभव भी पढ़कर जान सकते हैं। लेकिन ऐसा करते वक्त हमेशा कागजी शेरों को अलग से पहचानना होगा, उनकी हवा-हवाई कहानियों से बचना होगा। सबसे अहम है बाज़ार में उपलब्ध डेटा में गोता लगाने का हुनर। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

आपको शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से प्रतिमाह कम से कम एक लाख रुपए कमाने हैं। अमूमन बीस दिन की ट्रेडिंग का मतलब, औसतन 5000 रुपए प्रतिदिन। हर दिन एक जैसा नहीं होता तो किसी दिन ज्यादा भी कमाना पड़ेगा। किसी भी स्तर की ट्रेनिंग, किसी गुरु की कृपा या किस्मत से यह नहीं मिलेगा। यह आपके सिस्टम, अनुशासन व सजगता से मिलेगा। द्रोणाचार्य बहाना हैं। एकलव्य को खुद अभ्यास से पारंगत बनना होगा। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयर बाज़ार और ट्रेडिंग को 100% देने का क्या व्यावहारिक मतलब है? यही कि शेयर बाज़ार के चेहरे, चाल व चरित्र को अच्छी तरह समझते रहना। जीवन का यह मंत्र अपने मन में गहरे पैठा लें कि कुछ भी अकारण नहीं होता। जो हुआ, उसका कोई न कोई कारण ज़रूर होता है। शेयर के भाव बढ़े या गिरे तो उसका कोई न कोई कारण ज़रूर रहा होगा। तहकीकात से सही कारण तलाशते/जानते रहें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी