शेयर बाज़ार के मूल स्वभाव के बारे में हमेशा याद रखें कि आज व अभी का भाव भविष्य में कंपनी के साथ जो होगा, उसका जो नफा-नुकसान हो सकता है, उसे जज़्ब या डिस्काउंट किए रहता है। लिस्टेड कपनी के शेयर के भाव में अभी तक सारी उपलब्ध और अनुमानित जानकारियों व सूचनाओं का समावेश होता है। बड़े-बड़े दिग्गजों, उन्नत सॉफ्टवेयर की गणनाओं और कंपनी व उद्योग के पारखी लोगों की सम्मिलित अपेक्षाओं को दर्शाता है उसकेऔरऔर भी

जो दूसरा काम-धंधा या नौकरी करने की वजह से शेयर बाज़ार को सुबह से शाम तक बराबर वक्त नहीं दे सकते, वे इंट्रा-डे ट्रेडिंग का चौकन्नापन नहीं बरत सकते तो उनके लिए मुफीद होती है स्विंग, मोमेंटम या पोजिशनल ट्रेडिंग। यह तीन-चार दिनों से लेकर महीने-डेढ़ महीने की हो सकती है। इंट्रा-डे ट्रेडरों की तरह इन सौदौं में ब्रोकर से उधार या लीवरेज़/मार्जिन की सुविधा नहीं मिलती तो ज्यादा पूंजी लगानी पड़ती है। लेकिन मार्जिन का रिस्कऔरऔर भी

शेयर बाज़ार से अपने यहां लाखों इंट्रा-डे ट्रेडर जुड़े हुए हैं। इनमें बहुतेरे ब्रोकरों के लिए जॉबर का काम करते हैं, शेयरों में सक्रियता के लिए घुमा-घुमाकर इधर से खरीदो, उधर से बेचो के सौदे करते रहते हैं। वे ब्रोकर से दिन भर में हज़ार रुपए भी कमा लें तो बहुत है। बाकी, इंट्रा-डे ट्रेडिंग वे करते हैं जिनके पास सुबह से शाम तक पूरा समय होता है। वे पार्टटाइम नहीं, फुलटाइम ट्रेडिंग करते हैं। उनकी धड़कनेंऔरऔर भी

जब तक आपके पास रोज़ी-रोज़गार है, तब तक वर्तमान ज़रूरतों और भावी आकस्मिकताओं का इंतज़ाम कर लेने के बाद बचा हुआ धन शेयर बाज़ार में लगाने में कोई हर्ज नहीं। लेकिन इसका भी स्पष्ट अनुशासन है। आप 40-50 हज़ार से लेकर महीने में एक लाख रुपए तक की मध्यम कमाई करते हैं तो बचत को सोना, एफडी और म्यूचुअल फंड की एसआईपी वगैरह में लगाने के बाद जो इफरात धन बचता है, उसका 95 प्रतिशत हिस्सा शेयरऔरऔर भी

पहले भी लगता था और अब भी दो साल में कोरोना की मार से बेरोज़गार हुए बहुतेरे लोगों को लगता है कि शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से अच्छा-खासा कमाया जा सकता है। ब्रोकर और बाज़ार के धंधे से जुड़े सभी लोग उन्हें बताते हैं कि इसके लिए ज्यादा पूंजी नहीं चाहिए। दो-चार हजार से शुरू कर सकते हैं। लेकिन उनके कहने पर जो कूद पड़ा, उसके दो-चार हज़ार डूबने के बाद निकालने के चक्कर में अपने साथऔरऔर भी