देश नहीं, इनका मित्रहित सबसे ऊपर!
आज के दौर में 17 रेअर अर्थ खनिज मजबूत व समृद्ध राष्ट्र की आधारशिला बन गए हैं। ये खनिज दरअसल धरती के भीतर पाए जानेवाले ऐसे तत्व हैं जो हरित ऊर्जा तक पहुंचने से लेकर देश के डिफेंस सिस्टम और इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर व सोलर पैनल जैसे उद्योगों के लिए बेहद ज़रूरी हैं। लेकिन खुद को राष्ट्रवादी बतानेवाली मोदी सरकार ने अपने 12 सालों के शासन में इन दुर्लभ तत्वों की प्राप्ति के लिए कुछ भी सार्थकऔरऔर भी
करते हैं इनके राष्ट्रवाद का लिटमस टेस्ट
राष्ट्रवादी सरकार वही है तो देश के प्राकृतिक व मानव संसाधनों का अधिकतम न हो सके तो अभीष्टतम विकास करे। मैक्सिमम नहीं तो ऑप्टिमम। यही देश को आत्मनिर्भर बनाने का भी असली सूत्र है। बाकी सब फालतू बातें और खोखले नारे हैं। मोदी सरकार के राष्ट्रवादी होने के दावे को इसी आधार पर परखा जाना चाहिए। मानव संसाधनों पर यह सरकार 12 सालों में पूरी तरह एक्सपोज़ हो चुकी है। अभी प्राकृतिक संसाधनों पर उसको परखा जानाऔरऔर भी
युद्ध के कोहराम में शेयर बाज़ार धड़ाम!
मध्य-पूर्व में युद्ध का कोहराम। शेयर बाज़ार में अफरातफरी का आलम। हर दिन और हफ्ते निवेशकों की भीड़ हांकनेवाले दिग्गज कह रहे हैं कि यह मंदी का बाज़ार है और सब कुछ बेच-बांचकर निकल लो। लम्बे निवेश की सोच व दृष्टि रखनेवाले निवेशकों को इस भेड़चाल से मुक्ति पानी होगी। यह सच है कि अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर थोपे गए युद्ध की क्रिया-प्रतिक्रिया में कच्चे तेल के दाम करीब 25% बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचऔरऔर भी
नई सीरीज़ में छोटी हो गई अर्थव्यवस्था!
जिस अर्थव्यवस्था के आकार को लेकर सरकार पिछले कई साल से डींग मार रही थी कि हम दुनिया की पांचवीं के बाद चौथी अर्थव्यवस्था बन गए हैं और जल्दी ही तीसरी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हैं, उसका आकार 2022-23 को आधार वर्ष बनाते ही घट गया है। पुरानी सीरीज़ में 2022-23 में अर्थव्यवस्था का आकार या नॉमिनल जीडीपी ₹268,90,473 करोड़ था, जो नई सीरीज़ में इससे 2.9% कम ₹261,17,627 करोड़ निकला है। इसी तरह 2023-24 में नॉमिनलऔरऔर भी






