बनाएं अपना सिस्टम जो बचाए रिस्क से!
सवाल उठता है कि शेयर बाज़ार में बने आज के हालात में क्या किया जाए? ट्रेडर या निवेशक का रास्ता क्या है? अगर ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो सीधा-सा जवाब है कि ट्रेडिंग में ऐसी ऊंच-नीच बराबर आती रहती है। यह बाज़ार का मूल स्वभाव है। इसलिए ट्रेडिंग में सफलता या बाज़ार से नियमित कमाई के लिए आपको अपने माफिक अच्छा-सा ट्रेडिंग सिस्टम विकसित करना होगा और लगातार सच्चाई पर उसे कसते और आजमाते हुए बराबर अपग्रेडऔरऔर भी
अनिश्चितता बाहर है, अंदर भी कम नहीं!
बाज़ार को दो साल से चढ़ाए जा रहे देश के प्रोफेनशल निवेशक हों, संस्थाएं या विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) हो, वे इधर जमकर मुनाफावसूली कर रह हैं तो यह एकदम स्वाभाविक है। जो भी ज्यादा कमा लेता है, उसे सब गंवा देने की चिंता सताती है। वो भी तब जब तरफ अनिश्चितता के घने बादल छाते जा रहे हों। बाहर ही नहीं, अब तो देश के भीतर भी पांच राज्यों के ताज़ा विधानसभा चुनावों ने अनिश्चितता बढ़ाऔरऔर भी
युद्ध न होता तब भी चलती मुनाफावसूली
बकने को कोई भी कुछ बक सकता है। लेकिन जिन तथाकथित विशेषज्ञों या एक्सपर्ट्स को आप हर दिन बिजनेस चैनलों पर देखते है कि वे भी गारंटी नहीं दे सकते कि आगे शेयर बाज़ार का क्या हाल होगा। रूस-यूक्रेन का युद्ध तो तात्कालिक मामला है। इससे पहले भी अमेरिका समेत सारी दुनिया में बढ़ती मुद्रास्फीति और उसे समतल करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने की तलवार लटकी हुई थी। यह काम इसी मार्च महीने में होना है।औरऔर भी
चाल है अनिश्चित, नज़रिया हो गया छोटा
बाज़ार में इस समय इतनी उथल-पुथल चल रही है कि किसी भी स्टॉक के भाव का अनुमान लगाना लगभग असंभव है। लम्बे समय से दबा चला आ रहा किसी अच्छी कंपनी का शेयर अचानक 5-6% उछलता है तो लगता है कि अब इसने तेज़ी की राह पकड़ ली। लेकिन अगले ही दिन उसके पुराने निवेशक मुनाफावसूली कर डालते हैं तो शेयर फिर धड़ाम हो जाता है। ट्रेडरों का रवैया बेहद छोटा हो गया है। वे मुनाफे काऔरऔर भी






