मुद्रास्फीति जब 40 सालों के उच्चतम स्तर 7.9% पर पहुंच गई हो, तब अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व को सांकेतिक ब्याज दर की रेंज को बढ़ाकर 0.25-0.50% करना ही था। मार्च 2020 में कोरोना महामारी के बाद से वहां इसे शून्य से 0.25% रखा गया था ताकि अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलता रहे। लेकिन बुधवार को भारतीय समय के मुताबिक रात 11 बजे फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर बढ़ाने का फैसला कर लिया। इस साल फेडरल ओपनऔरऔर भी

विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) दुनिया भर की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से उसी देश में निवेश करते हैं जहां कम रिस्क में ज्यादा रिटर्न पाने की भरपूर संभावना होती है। भारत यकीनन दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ सकनेवाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। लेकिन बढ़ती मुद्रास्फीति, महंगे कच्चे तेल पर निर्भरता, बेलगाम राजकोषीय़ घाटे और अटके आर्थिक सुधारों ने भारत की संभावनाओं को कमज़ोर किया है। क्या एफआईआई इस वजह से भारत से निकल रहे हैं? वेऔरऔर भी

यूं तो किसी भी देश में घुसे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का स्वभाव ही है फटाफट मुनाफा कमाकर निकल जाना। लेकिन उनके द्वारा भारतीय शेयर बाज़ार में लगातार छह महीने से बेचते जाना और दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा निकाल लेना अपने-आप में चौंकानेवाली घटना है। आखिर जिस भारत को लेकर वे दशकों से आशावान रहे हैं, वहां से इस कदर भागने की वजह क्या है? क्या उनकी आशा निराशा में बदल गई है और वे ‘बुलिश’औरऔर भी

विदेशी संस्थागत या पोर्टफोलियो निवेशक पिछले छह महीनों से लगातार भारतीय शेयर बाज़ार में बेचे जा रहे हैं। यह सिलसिला तब से शुरू हुआ है, जब से 19 अक्टूबर 2021 को निफ्टी-50 ने 18,604.65 अंक छूकर अब तक का ऐतिहासिक शिखर बनाया। उस हफ्ते से दिसंबर के अंत तक एफआईआई या एफपीआई ने हमारे शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट से 99,461 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की। सेबी की तरफ से व्यवस्थित डेटा रखनेवाली संस्था एनएसडीएल केऔरऔर भी

मौजूदा परिस्थिति में शेयर बाज़ार के लम्बे निवेशक के सामने क्या रास्ता है? इसका पहला जवाब तो यह कि एफडी या सरकारी बॉन्डों में आधी बचत लगा देने के बाद बाकी रकम का बड़ा हिस्सा म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों में एसआईपी (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के ज़रिए लगाएं। फिर भी सीधे स्टॉक्स में लगाना है तो ऊंचे स्तर की मजबूत कंपनियों के शेयर कम भाव पर खरीदें। जो मूलतः कमज़ोर कंपनियां हों, किसी भी वजह से घाटेऔरऔर भी