आसार डॉलर के ₹78 के ऊपर जाने के
मई में अपने यहां थोक महंगाई की दर 30 साल के उच्चतम स्तर 15.88% पर रही है, जबकि रिटेल मुद्रास्फीति 7.04% है। अमेरिका में इसी दौरान मुख्य मुद्रास्फीति की दर 8.6% रही है। अमेरिका इस पर काबू पाने के लिए इस साल ब्याज दर तीन बार में 1.50% बढ़ा चुका है। लेकिन अपने यहां अब भी सरकार अवाम को दुहने में लगी है। गैस सिलिंडर के दाम पहले से बढ़े हुए हैं। उन्हें थोड़ा घटाना मजबूरी थीऔरऔर भी
निवेश में वर्तमान नहीं, भविष्य महत्वपूर्ण
बुद्ध कहते थे, वर्तमान में रहो। अतीत इसी में मिलता और भविष्य यहीं से निकलता है। अगर इस क्षण को साध लिया तो सारा प्रवाह साफ दिख जाएगा। लेकिन क्षण में पैठकर प्रवाह को पकड़ना इतना आसान नहीं। वित्तीय जगत में तो निवेश की रीत यही है कि वर्तमान को नहीं, भविष्य को समझकर धन लगाओ। वर्तमान को जानो ताकि भविष्य को समझ सको। शेयर बाज़ार या निवेश के दूसरे माध्यम अतीत या वर्तमान की परवाह नहींऔरऔर भी
झांकी व हवाबाज़ी देख भाग रहे विदेशी
भारतीय शेयर बाज़ार जिस तरह झांकी पर चल रहा है, उसी तरह भारतीय अर्थव्यवस्था भी झांकी पर चल रही है। कहने को हमारा जीडीपी बीते वित्त वर्ष 2021-22 में 8.7% बढ़ा है। लेकिन हकीकत में देखें तो यह 2020-21 नहीं, बल्कि उससे भी एक साल पहले 2019-20 से मात्र 1.5% ज्यादा है। 2019-20 में हमारा जीडीपी 1,45,15,958 करोड़ रुपए था, जबकि 2021-22 के ताज़ा अनुमान के मुताबिक 1,47,35,515 करोड़ रुपए है। फिर भी तीन साल बाद 2024-25औरऔर भी
कर्म जीडीपी घटाने के, दावा बढ़ाने का!
रिजर्व बैंक ने रेपो दर बढ़ाकर बैंकों के लिए अतिरिक्त धन जुटाना महंगा कर दिया। लेकिन सवाल उठता है कि जब बैंकों के पास पहले से अतिरिक्त धन है तो रिजर्व बैंक से ज्यादा ब्याज पर क्यों उधार लेंगे? हां, रिजर्व बैंक के इस तरह ब्याज बढ़ाने से आम लोगों ही नहीं, उद्योग-धंधों के लिए धन महंगा हो जाएगा। इससे उनका पूंजी निवेश घट सकता है और देश की आर्थिक विकास दर पर नकारात्मक असर पड़ेगा। रिजर्वऔरऔर भी







