क्या शेयर बाज़ार में चल रही डब्बा ट्रेडिंग से स्टॉक्स के भावों पर कोई असर पड़ता है? य़ह पता लगाना बेहद मुश्किल है क्योंकि कोई नहीं जानता कि इस गैर-कानूनी बाज़ार का टर्नओवर क्या है, इसमें कितना धन आता और निकलता है। हां, इतना ज़रूर कहा जा सकता है कि डब्बा ट्रेडिंग का जो हिस्सा ऑपरेटर एक्सचेंज पर ले जाते हैं, उसका थोड़ा असर स्टॉक्स के भावों पर पड़ता होगा। बताते हैं कि डब्बा ट्रेडिंग में शुक्रवारऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में हो रही गैर-कानूनी डब्बा ट्रेडिंग में ट्रेड करनेवाले क्लाएंट को कोई फायदा नहीं होता। इसमें ऑपरेटर ही कमाते हैं। वे अपने जाल में कमज़ोर हैसियत वाले लोगों को फांसते हैं और उन्हें निचोड़ डालते हैं। अगर क्लाएंट ने कभी कमा भी लिया तो ऑपरेटर उसे भुगतान नहीं करता। फिर भी सेबी की सख्ती के बावजूद डब्बा ट्रेडिंग चल रही है तो इसकी वजह है मूर्ख लोगों की लालच और मक्कार ऑपरेटर का जाल। निष्कर्षऔरऔर भी

शेयर बाज़ार स्वभाव से ही अधीर है। लेकिन इसमें लम्बे समय के लिए निवेश करनेवालों को बड़ा धैर्यवान होना पड़ता है। उन्होंने अधीरता दिखाई तो यहां से कभी कमा नहीं सकते। अधीर स्वभाव वाले निवेशकों को सरकारी बॉन्डो, पीपीएफ या बैंक डिपॉजिट का ही आसरा लेना चाहिए। नहीं तो शेयर बाज़ार के निवेश को लेकर वे ताज़िंदगी रोते ही रहेंगे कि मार डाला, हाय! मारा डाला। संभावनामय बिजनेस वाली कंपनी चुनो और भूल जाओ। कंपनी के कामकाजऔरऔर भी

डब्बा ट्रेडिंग में ऐसे भी मामले होते हैं कि एक्सचेंज के सर्वर पर कोई सौदा नहीं होता। क्लाएंट को घाटा हो रहा होता है, फिर भी वह सौदा नहीं काटता। वह घाटे पर सौदा काट भी ले तो ऑपरेटर उसे क्रेडिट दे देता है। असल में उसका सारा तंत्र हवा-हवाई होता है। उसे बस क्लाएंट को चूना लगाना होता है। आपसे धन लेना होगा तो ऑपरेटर आपके घर रिकवरी एजेंट भेज देगा। लेकिन उसको धन देना होगाऔरऔर भी

जो डब्बा ऑपरेटर स्टॉक एक्सचेंज के जरिए और ब्रोकर को शामिल करके आपके डब्बा ट्रेड को अंजाम देता है, वह यकीनन गैर-कानूनी काम करता है। लेकिन जो डब्बा ऑपरेटर एक्सचेंज का सहारा नहीं लेता, वह कहीं ज्यादा खतरनाक है। वह चूंकि एक्सचेंज या किसी ब्रोकर को शामिल नहीं करता तो उसे न कोई मार्जिन देना होता है और न ही ब्रोकरेज, इसलिए आपसे बहुत कम शुल्क लेता है। लेकिन वह अपनी कोई पूंजी नहीं लगाता और केवलऔरऔर भी