बड़ी कंपनियों में है सुरक्षा, छोटी में कहां!
बड़े व नामी निवेशक छोटी-छोटी कंपनियों को पकड़ते हैं। जैसे, आकाश कचोलिया देश के सफलतम निवेशकों में गिने जाते हैं। उन्हें मल्टी-बैगर यानी कई गुना बढ़नेवाले स्टॉक्स को पकड़ने का महारथी माना जाता है। उन्होंने शेयर बाज़ार में निवेश से करीब 1700 करोड़ रुपए की दौलत बनाई है। उनके निवेश पोर्टफोलियो की पांच शीर्ष कंपनियां हैं – सफारी इंडस्ट्रीज़, शैली इंजीनियरिंग प्लास्टिक्स, एनआईआईटी, फिलिप्स कार्बन ब्लैंक और रेनबो चिल्ड्रेन्स मेडिकेयर। इनमें से सफारी और एनआईआईटी के अलावाऔरऔर भी
गुरूर ठीक नहीं, चुनौतियां विश्वगुरु की
अमेरिका में आर्थिक मंदी की आशंका। चीन की आर्थिक विकास दर 2.7% रह जाने का अनुमान। साथ ही समूची विश्व अर्थव्यवस्था बहुत बढ़ी तो 2023 में 2.7% बढ़ सकती है। ऐसे में भारत इस साल 2022-23 में 6.9% और नए साल 2023-24 में 5-6% भी बढ़ जाए तो दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा। ऐसे में हम भारतीय बड़े आराम से गाल फुलाकर हनुमान बनने के सरकारी स्वांग के झांसे में आ सकतेऔरऔर भी
अमेरिकी शेयर बाज़ार कब तलहटी तक
अमेरिका की सिर चढ़ी मुद्रास्फीति और उसे थामने के लिए बढ़ाई जा रही ब्याज दरें वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए संकट का सबब बनी हुई हैं। वहां पिछले दस सालों में औसत मुद्रास्फीति 1.88% रही है। लेकिन बीते वर्ष 2022 में यह 8% पर पहुंच गई। नवंबर में यह घटकर 7.1% पर आ गई। लेकिन जानकारों का मानना है कि भले ही यह दर शीर्ष पर पहुंचकर नीचे उतरी हो। लेकिन सरकारी नीतियों के चलते यह फिर पलटकरऔरऔर भी
चीन व अमेरिका समेत दुनिया दबाव में!
विश्व बैंक ने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की विकास दर का अऩुमान घटाकर 2.7% कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) का आकलन है कि विश्व अर्थव्यवस्था साल 2022 में भले ही 3.2% बढ़ जाए, लेकिन इस साल 2023 में वह ज्यादा से ज्यादा 2.7% ही बढ़ सकती है। यह साल 2001 के बाद की सबसे कम विकास दर होगी, अगर हम 2008 के वित्तीय संकट और 2020 की कोरोना महामारी की विशिष्ट स्थिति कोऔरऔर भी










