उत्पादन के चार कारक हैं भूमि, श्रम, पूंजी व उद्यमशीलता। इनके मिलने से ही वे तमाम माल व सेवाएं बनती हैं जिनसे हमारी अर्थव्यवस्था बनती है। इनमें से पूंजी, उद्यमशीलता और भूमि की चर्चा जमकर होती है। लेकिन उत्पादन व अर्थव्यवस्था में अहम योगदान करनेवाले श्रम को किनारे कर दिया जाता है। हम भी 1 मई को महाराष्ट्र दिवस और गुजरात दिवस मनाने के चक्कर में अक्सर भूल जाते हैं कि यह अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस या मईऔरऔर भी

अनिश्चितता से भरी दुनिया है तो धंधे में भी ऊपर-नीचे चलता रहता है। कभी तेज़ तो कभी मंदा। कंपनियों के शेयर सीधे-सीधे उसके धंधे से प्रभावित होते हैं तो अगर उसमें ऑपरेटर सक्रिय न हों तो धंधे के मंदा पड़ते ही शेयर भी ठंडे पड़ने लगते हैं। ऐसे में लम्बे समय के निवेशक को क्या करना चाहिए? नियम व समझदारी कहती है कि अगर किसी भी वजह से कोई शेयर हमारे खरीद मूल्य से 25% तक गिरऔरऔर भी

हमारा मौसम विभाग अल-निनो के आसन्न खतरे से भले ही इनकार कर रहा है। लेकिन सारी दुनिया में इसको लेकर हाहाकार मचा हुआ है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक अन-निनो से के उपजी असामान्य गरमी से आमतौर पर ठंडे रहनेवाले यूरोप में बीते साल 2022 के दौरान 15,000 लोगों की मौत हो गई। भारत में अभी जबरदस्त गरमी की लहर चल रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु में होऔरऔर भी

अल-निनो मध्य प्रशांत महासागर में तापमान के बढ़ने की एक चक्रीय परिघटना है। भारत पर इसके आने का असर यह होता है कि दस सालों में से छह साल में देश के पश्चिमी, उत्तर-पश्चिम व मध्य-भारत के पश्चिमी हिस्से में कम बारिश होती है। साल 1951 से 1922 तक के 71 सालों में 15 साल अल-निनो के रहे हैं। इस दौरान मध्य व भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में तापमान आधा डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ गया। इससे नौऔरऔर भी