सब चले आसमान, ये अभी ज़मीन पर!
शेयर बाज़ार ऐतिहासिक शिखर पर। हर दिन नए से नए शिखर की ओर। यह आम निवेशकों और रिटेल ट्रेडरों के लिए बड़ा खतरनाक दौर है। ज़रा-सा भी अच्छी कंपनी है तो उसके शेयर 52 हफ्ते के शिखर के एकदम करीब हैं या नया शिखर पकड़ते जा रहे हैं। पहले ट्रेडर ऐसी कंपनियों में स्विंग या मोमेंटम ट्रेड से कुछ दिनों में 8-10% कमा सकता था। लेकिन अब उनकी कमाई 2-4% तक सिमट गई है। वो भी अनिश्चित,औरऔर भी
बड़ों का चलता खेल, रिटेल होते कंगाल
शेयर बाज़ार बहुत-बहुत धनवालों और बैंकों, म्यूचुअल फंडों, बीमा कंपनियों व एफपीआई जैसे बड़े-बड़े संस्थागत निवेशकों का खेल है। इसमें आम लोगों को म्यूचुअल फंड के ज़रिए ही एंट्री लेनी चाहिए क्योंकि तब वे भी बड़ी निवेशक संस्था का हिस्सा बन जाते हैं। दुनिया भर का यही रिवाज़ है क्योंकि इसी में आम निवेशकों की सुरक्षा है। रिटेल ट्रेडर तो शुरू से ही महारथियों से पंगा लेता है। इसलिए आम या रिटेल ट्रेडर को बहुत हुआ तोऔरऔर भी
पंजीकृत निवेशक 13.56 करोड़ के पार!
अभी भारतीय मध्यवर्ग की आबादी कितनी होगी, इसका कोई पक्का अनुमान या आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। इसे हम 20 करोड़ मान लें तो इसका 67.85% हिस्सा फिलहाल शेयर बाज़ार से जुड़ चुका है। देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज बीएसई की वेबसाइट के मुताबिक, 12 जुलाई 2023 तक अपने यहां रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या 13,56,95,100 पर पहुंच चुकी है। इसमें साल भर में 23.86% की शानदार वृद्धि हुई है। सबसे ज्यादा 2,67,47,397 पंजीकृत निवेशक महाराष्ट्र में हैं।औरऔर भी
हर तरफ हैं गरीब, फिर मध्यवर्ग है कहां
मध्यवर्ग ही वह तबका है जिसके पास अपनी तात्कालिक और आकस्मिक ज़रूरतों को पूरा करने के बाद इतना धन बचता होगा कि वह शेयर बाज़ार में निवेश कर सके। जिन 81.5 करोड़ लोगों को सरकार मुफ्त पांच किलो अनाज दे रही है, वे तो पेट भर लें, यही काफी है। वहीं, साल भर में 8 लाख रुपए या महीने भर में 66,667 तक कमानेवालों को आरक्षण के लिए आर्थिक रूप से गरीब माना गया है। वैसे, हमऔरऔर भी






