बुद्धिमानी नहीं, नीलामी पर टिका बाज़ार
शेयर बाज़ार समझदारों का खेल नहीं है। यह तो लालच और डर की भावनाओं में खिंचते व भागते धनवानों का खेल है। यह दरअसल नीलामी का बाज़ार का है जिसमें भविष्य की सोच कर दांव लगा दिया जाता है जो गलत भी पड़ सकता है और सौदा आगे जाकर गले की हड्डी बन सकता है। वहीं, रीयल एस्टेट बाज़ार समझदार व बुद्धिमान ग्राहक समझदार व बुद्धिमान ग्राहक के साथ सौदा करता है। इसलिए रीयल एस्टेट बाज़ार मेंऔरऔर भी
बाज़ार है सुप्रीम, पंगा लेना आत्मघाती!
शेयर बाज़ार में ओवर-ट्रेडिंग करना धन ही नहीं, तन व मन के लिए भी घातक है। साफ समझ लें कि ट्रेडिंग पूरी तरह मनोविज्ञान व सहज मानव-प्रवृत्तियों पर चलनेवाला खेल है। जितना ज्यादा आवेश में रहेंगे, उतना ही ज्यादा दूसरों के शिकार बन सकते हैं। इसलिए ट्रेडिंग में नियमित रूप से ब्रेक लेते रहना ज़रूरी है। अच्छा ट्रेड कर लिया, बड़ा मुनाफा कमा लिया, तब भी कुछ दिन शांत रहना चाहिए क्योंकि तब आपको लगने लगता हैऔरऔर भी
आपके ट्रेड से दूसरों की कमाई कितनी!
शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का बिजनेस है, टैक्स के लिहाज़ से भी और धंधे व समय के लिहाज़ से भी। इसलिए इसमें व्यापारी की तरह सारे खर्च घटाकर ही अपना शुद्ध लाभ गिनना चाहिए। स्टॉप-लॉस तो इस बिजनेस का अनिवार्य व अपरिहार्य खर्च है ही, जिसके कोई ट्रेडर बच नहीं सकता। साथ ही उसे यह भी साफ-साफ पता होना चाहिए कि वह ब्रोकरेज़, एसटीटी (सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स), जीएसटी, एक्सचेंज ट्रांजैक्शन चार्ज, इम्पैक्ट कॉस्ट व सेबीऔरऔर भी
ज्यादा ट्रेड करना होता है घाटे का सौदा
शेयर बाज़ार में तेज़ी के मौजूदा दौर में जब कचरा स्टॉक्स तक उड़े जा रहे हों, तब तक रिटेल ट्रेडर के लिए पहला नियम यह होना चाहिए कि वो हमेशा मूलभूत रूप से मजबूत कंपनियों के स्टॉक्स ही चुने। इनमें भी तभी एंट्री ली जाए, जब वे तात्कालिक मुनाफावूली के चलते थोड़ा नीचे आ गए हों। अगर हल्की कंपनी के स्टॉक्स ले लिए तो वे उड़ते-उड़ते कभी भी धड़ाम हो सकते हैं। वहीं, मजबूत कंपनी के शेयरऔरऔर भी
दौर तेज़ी का, ब्रेकआउट ट्रेड ही कारगर
शेयर बाज़ार साफ तौर पर तेज़ी के दौर या अंग्रेज़ी में कहें बुल फेज़ में है। जो भी कंपनियां मूलभूत रूप से या फंडामेंटली मजबूत हैं, उनमें से ज्यादातर के शेयर ऐतिहासिक शिखर तक जा पहुंचे हैं। जिनके शेयर ठंडे पड़े हैं, उनमें निवेश तो किया जा सकता है, लेकिन ट्रेडिंग नहीं। ऐसे में आज आम ट्रेडर के दिमाग में सबसे बड़ा सवाल है कि वह किन स्टॉक्स में ट्रेड करे। इंट्रा-डे ट्रेडर के लिए कोई समस्याऔरऔर भी





