भारत में मध्यवर्ग ही है जो मॉल लेकर मल्टीप्लेक्स तक मेला लगाता है। इसी पर दुनिया के बड़े ब्रांड फोकस करते हैं। यही मध्यवर्ग है जिसका एक हिस्सा शेयर बाज़ार में निवेश व ट्रेडिंग करता है। आखिर यह वर्ग कितना बड़ा है और इसकी आबादी कितनी होगी? दो-तीन दशक पहले तक इसकी संख्या 15 से 25 करोड़ बताई जाती थी। अब तो यह संख्या 40 से 50 करोड़ कही जाने लगी है। लेकिन जानकार इस वर्ग कीऔरऔर भी

एचएनआई देश छोड़कर भागे जा रहे हैं तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई या एफआईआई) की मार का सामना कौन करेगा? क्या यह काम देशी संस्थागत निवेशक (डीआईआई) कर सकते हैं? कभी नहीं। आप शेयर बाज़ार में हर दिन कैश सेगमेंट में हो रही खरीद-फरोख्त के आंकड़े देखें तो पता चलेगा कि एफपीआई के साथ तो उनकी जबरदस्त जुगलबंदी चल रही है। वे खरीदते हैं तो ये बेचते हैं और इनकी खरीद को वे अपनी बिकवाली से पूराऔरऔर भी

शेयरों में निवेश के पांच बुनियादी नियम हैं। कंपनी को खुद ठोंक-बजाकर देखने के बाद ही निवेश करें। ऐसी ही कंपनी चुनें जो अपने धंधे और लाभप्रदता को लम्बे समय तक बनाए रख सके। ऐसी दमखम वाली कंपनी के भी शेयर तभी खरीदें, जब वे कम भाव में मिल रहे हों क्योंकि ज्यादा भाव में खरीदा तो अच्छा रिटर्न नहीं मिल सकता। निवेश हमेशा लम्बे समय के लिए करें क्योंकि छोटी अवधि की ट्रेडिंग अक्सर घाटे काऔरऔर भी

खूब हल्ला है कि मोदी सरकार के नौ सालों में दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाने के बाद भारत का पासपोर्ट बहुत मजबूत हो गया है। हकीकत क्या है? जापान का पासपोर्ट दुनिया में सबसे मजबूत है क्योंकि वो हो तो 193 देशों में या तो वीसा लेने की जरूरत नहीं होती या पहुंचने पर वीसा मिल जाता है। फिर सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जर्मनी व स्पेन का नंबर है। फिनलैंड जैसे छोटे देश का पासपोर्टऔरऔर भी

अच्छी बात यह है कि रोज़ी-रोज़गार से लेकर बेहतर जीवन के अवसरों की तलाश में परदेश चले गए भारतीय अपने लोगों को नहीं भूल जाते। वे बराबर अपनी कमाई का एक हिस्सा परिजनों को भेजते रहते हैं। साल 2022 में उनके द्वारा देश में भेजी गई रकम 24% बढ़कर 111 अरब डॉलर पर पहुंच गई। यह रकम दक्षिण एशिया में प्रवासी नागरिकों द्वारा भेजी गई कुल विदेशी मुद्रा का 63% थी और विश्व बैंक के 100 अरबऔरऔर भी