भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत यकीनन अच्छी नहीं है। लेकिन चूंकि उसके बढ़ने की रफ्तार चीन से ज्यादा है और अंतर्निहित संभावना काफी ज्यादा हैं तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक इस साल मार्च से लेकर अब तक शेयर बाज़ार में बराबर निवेश बढ़ाते जा रहे हैं। उन्होंने 25 मई तक इसमें 54,372 करोड़ रुपए डाले हैं। देश के आम निवेशक भी बाज़ार में सीधे तो नहीं, लेकिन म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों में भरपूर बचत लगा रहे हैं।औरऔर भी

अर्थव्यवस्था डूब रही है या दौड़ रही है, इसको लेकर सरकार व अर्थशास्त्रियों की राय विपरीत है। लेकिन इसको लेकर कोई मतभेद नहीं कि सरकार ने नौ सालों में टैक्स-संग्रह बढ़ाने में शानदार सफलता हासिल की है। वित्त वर्ष 2013-14 से 2022-23 तक के नौ साल में केंद्र सरकार का प्रत्यक्ष टैक्स-संग्रह 173% बढ़ा है। अप्रत्यक्ष टैक्स में जीएसटी का संग्रह हर महीने नया रिकॉर्ड बनाता रहता है। कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दाम घटने के बावजूद सरकारऔरऔर भी

अगर यह सच है कि हमारी अर्थव्यवस्था बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रही है और दुनिया मंदी के दलदल में धंसने जा रही है तो हमारे लोग इतनी बड़ी तादाद में भारतीय नागरिकता छोड़कर विदेश क्यों भागते जा रहे हैं? खुद विदेश मंत्री एस. जयशंकर से संसद में जानकारी दी है कि पिछले 11 सालों में 16 लाख भारतीय अपनी नागरिकता छोड़कर विदेश में जा बसे। बीते साल 2022 में यह संख्या सबसे ज्यादा 2,25,620 रही है।औरऔर भी

शीर्ष रेटिंग व रिसर्च एजेंसी क्रिसिल का आकलन है कि इस साल हमारा निर्यात बहुत हुआ तो 2-4% ही बढ़ सकता है क्योंकि हमारे निर्यात के दो सबसे ठिकानों – अमेरिका व यूरोप की विकास दर क्रमशः 2% से घटकर 1.4% और 3.5% से घटकर 0.7% रह जाने का अंदेशा है। ऐसे में हमारी अर्थव्यवस्था कैसे ज्यादा बढ़ सकती है? बीते वित्त वर्ष 2022-23 की विकास दर का अगला अनुमान 31 मई को आना है। यह दरऔरऔर भी