विज्ञान से जीता चांद, निवेश भी कमाल
चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भारत पहुंचा है तो किसी हवन, भजन-कीर्तन या नमाज नहीं, बल्कि विज्ञान के बल पर। हमें जीवन ही नहीं, निवेश तक के सवालों को सुलझाने में विज्ञान की इस ताकत को समझना होगा। विज्ञान के साथ चलने में फायदा ही फायदा, छलांग ही छलांग। न कोई धोखा, न कोई घाटा। इस समय कई कंपनियां अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मसलन, अवांटेल जैसी छोटी कंपनी ने 1990 ने काम शुरू कियाऔरऔर भी
शिक्षा, स्वास्थ्य, निवेश व कौशल ज़रूरी
रिजर्व बैंक ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि भारत को विकसित बनाने के लिए विकास का जाप करने और अब तक चला रहा रवैया जारी रखने से काम नहीं चलेगा। अभी जैसा ढर्रा रहा तो लक्षित समय में देश को विकसित देश बनाने के लिए जो विकास दर हमें हासिल करनी है, उससे हम काफी पीछे रह जाएंगे। यह लक्ष्य पाने के लिए नितांत आवश्यक है कि अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ाया जाए, लॉजिस्टिक्स की लागतऔरऔर भी
मैन्यूफैक्चरिंग बढ़े तो बने विकसित देश
जिन देशों ने उच्च-आय या विकसित देश तक का सफर तय किया है, उन्होंने दो खास काम किए। एक, छोटे से लेकर बड़े उद्योग-धंधों को बढ़ाने का सचेत फैसला और दो, विदेश व्यापार को खास तवज्जो। ये दोनों ही काम भारत की विकासयात्रा की मूल चुनौती बने हुए हैं। वैसे तो वैश्विक सुस्ती को देखते हुए विदेश व्यापार बढ़ाना काफी मुश्किल काम हो गया है। लेकिन जितना भी बढ़े, उसके लिए मैन्यूफैक्चरिंग को चमकाना ज़रूरी है। अभीऔरऔर भी
कैसे बने रोडमैप विकसित देश बनने का
इस समय दुनिया में जिन देशों की प्रति व्यक्ति आय 13,205 डॉलर से ज्यादा है, उन्हें विश्व बैंक ने उच्च आय या विकसित देशों की श्रेणी में रखा है। अपने रिजर्व बैंक के एक अध्ययन के मुताबिक आनेवाले दशकों में मुद्रास्फीति के असर को शामिल कर लिया जाए तो 2047 में उन्हें ही विकसित देश माना जाएगा जिनकी प्रति व्यक्ति आय 21,664 डॉलर होगी। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए डॉलर में भारत की प्रति व्यक्ति आयऔरऔर भी






