देश में पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक विकास हो रहा है। सड़कें बन रही हैं। चकाचक हाईवे बने जा रहे हैं। पुल बन रहे हैं। हवाई अड्डे बन रहे हैं। बंदरगाह विकसित हो रहे हैं। शहर-शहर मेट्रो चलने लगी हैं। जम्मू-कश्मीर में दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्क पुल 22 साल में बनकर चालू हो गया। जो दिखता है वो बिकता है। जो नहीं दिखता, वो गोपनीय है। विकास के ठेकों पर कमीशन बढ़ते-बढ़तेऔरऔर भी

अपने शेयर बाज़ार में बड़ों का नाम लेकर छोटों को चरका बढ़ाने का सिलसिला दशकों से चला आ रहा है। किसी ज़माने में कहा जाता था कि फलानां शेयर हर्षद मेहता ने खरीदा है। केतन पारिख से लेकर दामाणी का नाम भी चलता रहा। फिर राकेश झुनझुनवाला का झुनझुना बजने लगा। आज वही सिलसिला एफआईआई और म्यूचुअल फंडों व डीआईआई तक आ गया है। कहा जाता है कि फलानां शेयर एफआईआई खरीद रहे हैं या कोई नामीऔरऔर भी

सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का कहना है कि रुपए को और गिरने से रोकना बेहद ज़रूरी है। लेकिन रुपया डॉलर के मुकाबले बेरोकटोक गिरता ही जा रहा है, भले ही डॉलर सूचकांक बढ़े या गिरे। डॉलर सूचकांक इस साल जनवरी में 98.25 हुआ करता था। मार्च अंत में 100.59 हो गया। अब फिर 98.80 हो गया है। लेकिन रुपया केवल गिरना जानता है। वो जनवरी में औसतन प्रति डॉलर 90.73 का हुआ करताऔरऔर भी

निजी स्वार्थ में डूबा आत्मविभोर व्यक्ति सत्ताशीर्ष पर बैठकर देश-दुनिया का कितना नुकसान कर सकता है, इसे पश्चिम एशिया के वर्तमान संकट ने साबित कर दिया है। प्रधानंमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25-26 फरवरी को जेरूसलम जाकर फर्जी मेडल के चक्कर में ‘फादरलैंड’ कहकर इज़रायल को सिर न चढ़ाया होता तो शायद अमेरिका के साथ मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला करने की उसकी हिम्मत ही नहीं पड़ती। इस हमले के बाद ब्रेन्ट कच्चे तेल के दामऔरऔर भी

इधर मोदी का राजनीतिक विजय-रथ आसमान का रुख किए हुए है, उधर भारतीय रुपया रसातल में डूबता बराबर नई-नई तलहटी पकड़ता जा रहा है। आज एक डॉलर 95.91 रुपए और यूरो 112.27 रुपए पर जा पहुंचा। कमाल की बात यह है कि जनवरी 2025 से फरवरी 2026 तक जब रुपया खाक बनता जा रहा था, तब सरकारी और निजी अर्थशास्त्रियों ने कहा था कि भारत ‘गोल्डीलॉक्स’ अवस्था से गुजर रहा है, जहां आगे सब अच्छा ही अच्छाऔरऔर भी