ट्रम्प के 50% टैरिफ लगाने का हल्ला मचाया जा रहा है। 500% टैरिफ तक की बात कही जा रही है। लेकिन हकीकत यह है कि भारत के निर्यात में टैरिफ से बड़ी समस्याएं आंतरिक हैं। 25 नवंबर 2025 को बोर्ड ऑफ ट्रेड की बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए निर्यातकों से खुद वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से शिकायत की कि उन्हें कच्चा माल वैश्विक कीमतों से 15-20% महंगा मिलता है। बहुत सारे राज्यों में मालऔरऔर भी

अमेरिका से लेकर ब्रिटेन और जर्मनी तक, दुनिया के तमाम देश अपने हितों को सबसे ऊपर रखकर भारत से व्यापार वार्ता और संधि कर रहे हैं। चीन तक अपने उद्योगों के हित में भारत का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन भारत का हित आज हाशिए पर पड़ा है क्योंकि यहां करीब 12 सालों से ऐसी सरकार चल रही है जिसके लिए भारत का हित मतलब अडाणी जैसे उन चंद यारों का हित हो गया है जो उसेऔरऔर भी

देश किसी भी व्यक्ति से बहुत-बहुत ऊपर होता है, चाहे वो देश का प्रधानमंत्री ही क्यों न हो। हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इसके अपवाद नहीं हो सकते। लेकिन भाजपा सरकार और संघ परिवार के संगठन मोदी की घरेलू व विदेश नीति की निष्पक्ष समीक्षा करने के बजाय नितांत फर्जी तरीकों से उन्हें भारत देश से भी बड़ा बनाने के अभियान में लगे हैं। इसके लिए इतिहास तक को गलत तरीके से पेश किया जा रहाऔरऔर भी

दुनिया के रंगमंच पर भारत की इस समय विचित्र स्थिति है। विदेशी निवेशक भारतीय अर्थव्यवस्था के बेदम हाल को देखकर किनारा कस रहे हैं। विदेश में कार्यरत भारतीयों को जगह-जगह उलाहना का पात्र बनना पड़ रहा है। जब पता चलता है कि जर्मनी में काम कर रहे भारतीय लोग वही काम कर रहे जर्मनों से 20% ज्यादा कमा रहे हैं, साथ ही भारत में क्रिसमस के मौके पर ईसाइयों पर हमले होते हैं तो यूरोप के कईऔरऔर भी