हमारी निहित संभावना, आकार-प्रकार और मौजूदा भू-राजनीतिक हालात ने अमेरिका व यूरोप समेत समूचे पश्चिमी जगत की नज़र में भारत को आर्थिक व राजनीतिक रूप से चीन की जवाबी शक्ति बना दिया है। इसलिए वो भारत को चढ़ाने का कोई मौका नहीं चूकते। यह अलग बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका भरपूर निजी इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में उनका रूस जाना पश्चिमी दुनिया से मोलतोल करने का हीऔरऔर भी

व्यापक अवाम और विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ ही तमाम देशी-विदेशी अर्थशास्त्री तक कह रहे हैं कि इस समय भारत की सबसे विकट समस्या बेरोज़गारी है। लेकिन मोदी के नेतृत्व में चल रही एनडीए सरकार मानने को तैयार ही नहीं कि देश में बेरोज़गारी की कोई समस्या है। इसलिए अगले हफ्ते मंगलवार, 23 जुलाई को आ रहे आम बजट में हम इस समस्या को सुलझाने के सार्थक उपाय नहीं देख सकते। हो सकता है कि महाराष्ट्र सरकारऔरऔर भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में वादा किया था कि सत्ता संभालने के बाद उनकी सरकार हर साल 2 करोड़ रोज़गार पैदा करेगी। रिजर्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के बाद मोदी ललकारने लगे हैं कि पिछले तीन-चार साल में करीब-करीब 8 करोड़ नए रोज़गार बने हैं तो विपक्ष फालतू हल्ला मचा रहा है। लेकिन स्वतंत्र अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मोदी के दावे और रिजर्व बैंक की रिपोर्ट से कतई सहमत नहीं हैं। अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर सस्टेनेबलऔरऔर भी

शक्तिकांत दास को मोदी सरकार ने 12 दिसंबर 2018 से जब से रिजर्व बैंक का गवर्नर बनाया है, तभी से उन्होंने केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता व स्वतंत्रता को दरकिनार कर सरकार का दास बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। यह पद संभालने के बाद से अब तक वे रिजर्व बैंक के खज़ाने से 7,10,835 करोड़ रुपए केंद्र सरकार के हवाले कर चुके हैं। इस बीच 2021 में उन्हें तीन साल का पहला एक्सटेंशन मिल गया। उनकाऔरऔर भी