शेयर बाज़ार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) पर यह कहावत बखूबी लागू होती है कि गंजेड़ी यार किसके, दम लगाकर खिसके। एफपीआई का चरित्र ही ऐसा है कि कोई देश उन पर भरोसा नहीं कर सकता। वे वहीं और तभी तक निवेश करते हैं, जब तक उन्हें मुनाफा मिलता है। हालांकि निवेश में खटाखट नहीं, बल्कि दो-चार साल की सोचकर चलते हैं। सरकारी प्रचार और आंकड़ों की परवाह नही करते। इधर जब से उन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था केऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेश का बेसिक फंडा यह है कि इसमें उन्हीं लोगों को आना चाहिए जिनके पास रोजमर्रा ही नहीं, आकस्मिक जरूरतों का इंतज़ाम करने के बाद इफरात धन बचता हो। जिनकी स्थिति ऐसी नहीं है, उन्हें सबसे पहले रोज़ी-रोज़गार का इंतज़ाम करना चाहिए। इफरात धन का भी वही हिस्सा शेयरों में लगाएं जिसकी कई सालों तक ज़रूरत न हो और वो डूब भी जाए तो सेहत पर फर्क नहीं। हालांकि सोच यही रहे कि बचतऔरऔर भी

सेबी ने छोटे निवेशकों को बचाने के लिए फ्यूचर्स व ऑप्शंस का एक फ्रेमवर्क घोषित किया है जिसमें छह खास उपाय किए गए हैं। इंडेक्स डेरिवेटिव्स का कॉन्ट्रैक्ट साइज़ ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख, ऑप्शंस का प्रीमियम पहले से ले लेना, साप्ताहिक डेरिवेटिव सौदों में फेरबदल, पोजिशन लिमिट की इंट्रा-डे मॉनिटरिंग, एक्सपायरी के दिन विभिन्न एक्सपायरी के सौदों की पोजिशन को ऑफसेट करने की सुविधा खत्म और शॉर्ट ऑप्शंस सोदों पर अतिरिक्त 2% ईएलएम या एक्सट्रीमऔरऔर भी

अपने यहां शेयर बाज़ार में डेरिवेटिव या कहें तो फ्यूचर्स व ऑप्शंस ट्रेडिंग को लेकर जैसा उन्माद छाया हुआ है, वैसा दुनिया के किसी भी देश में नहीं है। दुनिया के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंजों में बाज़ार पूंजीकरण के लिहाज से भारत का नंबर अमेरिका, चीन, जापान व हांगकांग के बाद पांचवां है। लेकिन अपना एनएसई लगातार पांच सालों से दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज बना हुआ है। स्थिति यह हो गई है कि बाज़ार मेंऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में रिटेल निवेशक अगर म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीमों के जरिए ज्यादा पहुंच रहे हैं, नियमित एसआईपी कर रहे हैं तो यह एक स्वस्थ सिलसिला है। इससे वे भारत की विकासगाथा का हिस्सा बन रहे हैं। हालांकि इसमें भी रिस्क है, लेकिन यह रिस्क म्यूचुअल फंड स्कीमों के प्रोफेशनल मैनेजर और उनकी टीम संभालती रहती है। मगर, रिटेल निवेशकों का इंट्रा-डे ट्रेड और एफ एंड ओ, खासकर ऑप्शंस ट्रेडिंग में कूदना उनके लिए ही नहीं,औरऔर भी