स्वदेशी है पाखंड, विदेशी से लव-जेहाद!
मेक इन इंडिया का कार्यक्रम चलाया तो विदेशी कंपनियों से खुलकर कहा कि भारत में आकर बनाओ और दुनिया भर में बेचो। लेकिन 11 साल से ज्यादा वक्त बीतने के बाद स्थिति यह है कि देश में जितना विदेशी पूंजी निवेश आ रहा है, उससे ज्यादा स्वदेशी निवेश बाहर जा रहा है। स्वदेशी मैन्यूफैक्चरिंग का भट्ठा बैठ गया, जबकि उद्योग-धंधों में चीनी घुसपैठ बढ़ गई। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में एआई का विशाल वैश्विक सम्मेलन करऔरऔर भी
मैन्यूफैक्चरिंग दे रहा सबसे ज्यादा चंदा!
बेहद आश्चर्य की बात है कि देश के जिस मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की हालत पस्त है, भाजपा-नीत एनडीए के बारह सालों के शासन में जिसे बड़ी-बड़ी बातों के बावजूद अपने हाल पर छोड़ दिया गया, उसने राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने के लिए बने चुनावी ट्रस्टों को सबसे ज्यादा धन दिया है और इन ट्रस्टों ने सबसे ज्यादा चंदा भाजपा को दिया है। यह तथ्य एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के ताज़ा अध्ययन से उजागर हुआ है। आखिर इसऔरऔर भी
विषमता से भरा समाज और बाज़ार भी
हमारे समाज जैसी ही विषमता शेयर बाज़ार में भी छाई हुई है। एक तरफ मुकेश अंबानी अपने बेटे की शादी पर 5000 करोड़ रुपए चुटकी बजाकर उड़ा देते हैं, दूसरी तरफ 81.35 करोड़ लोग अब भी हर महीने सरकार से मिलनेवाले मुफ्त पांच किलो राशन के मोहताज हैं। इसी तरह शेयर बाजार में निफ्टी-50 सूचकांक में शामिल कंपनियों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर इटरनल जैसी एक तिहाई कंपनियां 50 से ज्यादा पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहीऔरऔर भी
गांधी के बाद भारतीय राष्ट्र की भी हत्या!
राष्ट्रवाद एक ऐसी पवित्र भावना व धारणा है जिसमें देश की अस्मिता, संप्रभुता, भूभाग, आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक हितों की रक्षा के लिए सब कुछ बलिदान कर दिया जाता है। फिर खुद को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी बतानेवाली भाजपा, उसके सबसे ताकतवर व यशस्वी कहे जाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार का यह कर्म कैसे व क्यों कि जब चीन गलवान घाटी में घुसपैठ कर भारत की हज़ारों किलोमीटर ज़मीन कब्जा कर लेता है तो मोदी बयानऔरऔर भी






