ठगों का गिरोह अंततः भोले-भाले लोगों को झूठ पिलाने में सफल हो गया। गोएबल्स के हज़ारों बार बोले गए झूठ को अंततः सभी ने सच मान लिया। अब तो आम लोग ही नहीं, बड़े-बड़े विद्वान और मोदी सरकार के राजनीतिक विरोधी भी मान बैठे हैं कि भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्दी ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसलिए लोककभा में जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे कहते हैं कि भारत कीऔरऔर भी

आम लोगों के लिए शेय़र बाज़ार में अल्पकालिक ट्रेडिंग और दीर्घकालिक निवेश की रणनीति अलग-अलग होती है क्योंकि उन्हें अपना जोखिम संभालकर चलना होता है। रिटेल ट्रेडर के लिए उसकी सीमित पूंजी बहुत मायने रखती है क्योंकि ट्रेडिंग पूंजी डूबी तो उसका सारा आधार डूब जाएगा। उसे ट्रेडिंग तभी करनी चाहिए, जबकि न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न की गुंजाइश हो। उसे युद्ध जैसी अनिश्चितता के माहौल में बाज़ार का तमाशा दूर खड़े रहकर देखना चाहिए और हमेशाऔरऔर भी

हमारे विशाल देश भारत में रोज़गार की समस्या विकट सच्चाई है। इसे सुलझाना विकास की किसी भी रणनीति के केंद्र में होना चाहिए। लेकिन 2047 तक विकसित भारत का नारा उछाल रही मोदी सरकार इसे महज जुमले या हवाबाज़ी से हल करने का स्वांग रच रही है। हमारी आबादी की मीडियन या मध्यमान आयु मात्र 28 साल है। हमें यह भी समझना होगा कि लोग सरकार से नौकरियां नहीं, बल्कि ऐसी नीतियां चाहते हैं जिनसे रोज़ी-रोज़गार केऔरऔर भी

भारत जैसी युवा आबादी से लबालब भरे देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन न जाने क्यों मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी को एक निगाह से नहीं देखते। उन्होंने आर्थिक सर्वेक्षण में 2011 से लेकर अब तक की मुद्रास्फीति का सालाना डेटा देकर बताया है कि कैसे मुद्रास्फीति बराबर घटती रही है। लेकिन वो बेरोजगारी का ऐसा कोई डेटा नहीं देते। अगर इन्हीं 15 सालों के दौरान रही बेरोज़गारी का डेटा दे देते तो यह सच उजागर होऔरऔर भी