यह कैसा स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत है कि हमें 30.8% औद्योगिक माल चीन से आयात करना पड़ रहा है। भारत हर साल चीन से 50 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स व इलेक्ट्रिक उपकरण, 27 अरब डॉलर की मशीनरी और 13 अरब डॉलर के कार्बनिक रसायन, प्लास्टिक व स्टील मेडिकल उपकरण जैसे उत्पाद आयात करता हैं। ये ऐसे आवश्यक उत्पाद हैं जिनके बिना भारतीय अर्थव्यवस्था चल नहीं पाएगी। दुनिया में इनके वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध हैं, लेकिन काफी महंगे। ऊपर से चीन अपना माल भारत में सीधे ही नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों से भी भेजता है। भारत को इन उत्पादों को देश में बनाने का तंत्र खड़ा करना चाहिए था। लेकिन मोदी सरकार तो चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आमंत्रित कर रही है। वो भी तब चीन लद्दाख में हमारी 38,000 वर्ग किलोमीटर ज़मीन पर कब्ज़ा करके बैठा है। मगर भारत में निवेश में चीन की कोई दिलचस्पी नहीं। ऐसा नहीं कि चीन बाहर निवेश नहीं करता। उसका करीब 70% निवेश दक्षिण-पूर्व एशिया में है। यह राशि लगभग 2.2 लाख करोड़ डॉलर है। उसने लैटिन अमेरिका में 500 अरब डॉलर, यूरोप में 200 अरब डॉलर और अफ्रीका में 100 अरब डॉलर तक का निवेश कर रखा है। लेकिन भारत में 2020 से अब तक उसका कुल निवेश मात्र 2.51 अरब डॉलर है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…
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