जिस देश के तीन-चौथाई से ज्यादा लोग दिन में 50 रुपए से कम में गुजारा करते हों, वहां की केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में अगर तीन-चौथाई से ज्यादा मंत्री करोड़पति हों तो एक बात तो साफ है कि यह सरकार सही मायनों में बहुमत का प्रतिनिधित्व नहीं करती। सवाल यह भी है कि केंद्र की कांग्रेस लेकर, उत्तर प्रदेश की बीएसपी, तमिलनाडु की एआईडीएके और गुजरात की बीजेपी में आंतरिक लोकतंत्र नहीं है तो ये पार्टियां देशऔरऔर भी

धीरे-धीरे साफ होता जा रहा है कि सब शेयरों को थोक के भाव एक ही तराजू में नहीं तौला जा सकता। उसी तरह जैसे सब धान पाइस पसेरी नहीं तौलते। लांग टर्म या दो से दस साल के लिए अलग, मीडियम टर्म या दो महीने से दो साल तक के लिए अलग, शॉर्ट टर्म या हफ्ते दस दिन से दो महीने तक के लिए अलग और एकाध दिन की ट्रेडिंग के लिए अलग। फंडामेंटल्स के आधार परऔरऔर भी

करते हम हैं और नाम दूसरों का लगा लेते हैं। इससे हम तो कमजोर के कमजोर रह जाते हैं और दूसरा भगवान और भगवान, सर्व-शक्तिमान बन जाता है। अन्यथा उनकी औकात कंकड़ से ज्यादा नहीं।और भीऔर भी

इंसानों की बस्ती में हम या तो अपने या दूसरों के कर्मों का नतीजा भुगतते हैं। यहां छिपकर कहीं कोई खुदा नहीं बैठा जो हमारी सदिच्छाओं को पूरा करता रहे या बिना किसी बात के हमें दंडित करता रहे।और भीऔर भी

शेयर बाजार के बारे में एक सिद्धांत नहीं, बल्कि परिकल्पना है जिसके मुताबिक, कोई भी निवेशक न तो दबे हुए मूल्य के स्टॉक को खरीद सकता है और न ही बढ़े हुए मूल्य के स्टॉक को बेच सकता है। इसे ईएमएच, एफिशिएंट मार्केट हाइपोथिसिस कहते हैं जिसे हम हिंदी में कुशल बाजार परिकल्पना कह सकते हैं। यह परिकल्पना सस्ते में खरीदो, महंगे में बेचों के सूत्र के परखचे उड़ा देती है। कहती है कि कोई भी निवेशकऔरऔर भी

हफ्ते के सातों दिन किसी न किसी देव को समर्पित हैं जो हमारे ही अंतर्निहित तत्वों के नाम हैं। इनमें से सबसे प्रखर देव सूर्य और शनि हैं। लेकिन इन दोनों ही दिनों हम निढाल पड़े जम्हाई ले रहे होते हैं!और भीऔर भी

अपने यहां इनकम टैक्स की अधिकतम दर 30% है,  जबकि चीन में यह दर 45%, जर्मनी में 45%, जापान में 50% और स्वीडन में 57% है। लेकिन टैक्स की कम दरों के बावजूद भारत में अवाम पर बोझ ज्यादा है। कारण, भारत में सामाजिक सुरक्षा नहीं है, जबकि यहां गिनाए गए सभी देशों में हर व्यक्ति को रिटायरमेंट पेंशन, स्वास्थ्य और बच्चों के पालन-पोषण की अनिवार्य बीमा सरकार की तरफ से मिलती है। ऊपर से भारत मेंऔरऔर भी

वित्त मंत्रालय से लेकर पूरी सरकार को चिंता सताए जा रही है कि कहीं ब्याज दरें बढ़ने से देश की आर्थिक व औद्योगिक विकास दर और धीमी न पड़ जाए। इसलिए वे चाहते थे कि ब्याज दरें अब न बढ़ाई जाएं। लेकिन ऊपर-ऊपर मंत्री से लेकर सलाहकार तक रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर बढ़ाने का समर्थन कर रहे हैं। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने रिजर्व बैंक द्वारा शुक्रवार को रेपो व रिवर्स रेपो दरों में 0.25 फीसदीऔरऔर भी

लगातार दो महीने तक जोरदार तेजी दिखाने के बाद जुलाई में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 38 फीसदी घटकर 1.09 अरब डॉलर रह गया है। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पिछले साल जुलाई देश में 1.78 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया था। बता दें कि जून माह में देश में एफडीआई का प्रवाह सालाना आधार पर 310 फीसदी बढ़कर 11 साल में किसी भी महीने के रिकॉर्ड स्तर 5.65 अरब डॉलरऔरऔर भी

सरकार चालू वित्त वर्ष 2011-12 के लिए सभी उद्योगों की ड्यूटी ड्रॉबैक दरों (एआईआर) की अधिसूचना जल्दी ही जारी कर देगी। इन दरों की सूची तैयार करने का जिम्मा सरकार ने इस साल जनवरी में ही योजना आयोग के सदस्य सौमित्र चौधरी की अध्‍यक्षता में बनी एक समिति को सौंप दिया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है जिसकी सिफारिशों पर गौर किया जा रहा है। इस साल 30 सितंबर तक डीईपीबी (शुल्‍क हकनामाऔरऔर भी