विनिवेश के लिए नीलामी का रास्ता अपनाएंगे

भले ही मार्च में ओएनजीसी के 5 फीसदी शेयरों की नीलामी में केंद्र सरकार की काफी फजीहत हुई हो, लेकिन चालू वित्त वर्ष 2012-13 में 30,000 करोड़ रुपए के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए वह मुख्य रूप से नीलामी का ही तरीका अपनाएगी।

वित्त मंत्रालय में विनिवेश विभाग के प्रमुख, मोहम्मद हलीम खान ने सोमवार को समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत के दौरान कहा, “जब आप एफपीओ (फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर) लाते हैं तो संबंधित कंपनी के शेयरों के भाव बाजार में दबाव में आ जाते हैं। आशा करते हैं कि हम इस बार ओएनजीसी जैसी नीलामियां ज्यादा करेंगे।” यह सच है कि एफपीओ की घोषणा होते ही अक्सर ऑपरेटर सरकारी कंपनियों के शेयरों के भाव दबा देते हैं।

मोहम्मद खान ने ओएनजीसी की नीलामी को जायज व सही ठहराया। सरकार ने बीते वित्त वर्ष में विनिनेश से 40,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा था। लेकिन वास्तव में वह केवल लगभग 14,000 करोड़ रुपए ही जुटा सकी। इस साल के बजट में विनिवेश से 30,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य घोषित किया गया है। सरकार इस धन का इस्तेमाल राजकोषीय घाटे को घटाने में करना चाहती है। बीते साल राजकोषीय घाटा जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 5.9 फीसदी रहा है, जबकि इस साल इसे जीडीपी के 5.1 फीसदी पर लाने का लक्ष्य रखा गया है।

खान ने बताया कि अगले कुछ महीनों में हालात कैसे रहते हैं, इसके मुताबिक ऑयल इंडिया, बीएचईएल, एमएमटीसी, सेल, नैवेली लिग्नाइट और नाल्को के एफपीओ पर भी विचार किया जा सकता है। उनका कहना है कि जून से सरकारी कंपनियों के विनिवेश के लिए नीलामी का सिलसिला शुरू किया जा सकता है। बहुत मुमकिन है कि नीलामी दो के बजाय एक ही स्टॉक एक्सचेंज के जरिए की जाए। साथ ही पूरे दिन के बजाय दो से तीन घंटों की नीलामी की जा सकती है।

बता दें कि सरकारी लिस्टेड कंपनियों को अगस्त 2013 तक पब्लिक की न्यूनतम हिस्सेदारी 25 फीसदी तक लानी है। इसलिए इन कंपनियों के लिए विनिवेश करना मजबूरी बन गया है।

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