भारत सरकार को सारे का सारा टैक्स हम करीब 146 करोड़ देशवासी देते हैं। इनकम टैक्स से लेकर जीएसटी और एक्साइज व कस्टम ड्यूटी तक के रूप में। यहां तक कि जो सरकारी योजनाओं के करोड़ों लाभार्थी हैं वे भी सरकार को टैक्स देते हैं। टैक्स में प्रत्यक्ष और परोक्ष का भेद करना सरकार की चाल है। साथ ही कमाल की बात है कि सरकार अपना तकरीबन सारा ऋण सीधे या घुमा-फिराकर भी हम से ही लेती है। मसलन, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत सरकार ₹16,95,768 करोड़ का ऋण ले रही है। इसमें से वो ₹15,385 करोड़ (0.91%) विदेशी ऋण से लेगी। बाकी बचे रह गए ₹16,80,383 करोड़ में से ₹3,86,772 करोड़ वो डाकघर, पीपीएफ, किसान विकास पत्र, सीनियर सिटीजन सेविंग्स, एनएससी व सुकन्या समृद्धि योजना जैसी लघु बचत स्कीमों से ले रही है। इसके ऊपर से ₹3500 करोड़ वो राज्य भविष्य निधि से लेगी। इधर-उधर की कुछ अन्य रकम को छोड़कर सरकार सबसे ज्यादा ₹13,03,210 करोड़ सीधे-सीधे बाज़ार से उधार लेकर जुटा रही है। इसमें से ₹1,30,000 करोड़ का साल भर से कम अवधि का ऋण है जिन्हें ट्रेजरी बिलों से जुटाया जा रहा है। बाकी ₹11,73,210 करोड़ की शुद्ध बाज़ार उधारी और ₹5,46,790 करोड़ पुराने ऋण उतारने के लिए हैं। कुल मिलाकर सरकार इस साल ₹17,20,000 करोड़ बॉन्ड बेचकर हासिल कर रही है। यह सारे का सारा लेगी हमारी ही बचत से। अब बुधवार की बुद्धि…
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