टैक्स छूट, ज्यादा ब्याज में नहीं समाधान!

पश्चिम एशिया संकट का आना-जाना महज एक बहाना है। मोदी सरकार ने 12 सालों में देश की अर्थव्यवस्था को जो जख्म दिए हैं, वे महज मरहम-पट्टी से नहीं भरेंगे। उसकी नीतियों के चलते वित्त वर्ष 2025-26 में देश का भुगतान संतुलन 30.8 अरब डॉलर के घाटे में चला गया। यह घाटा चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 50-75 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। सरकार ने इससे बचने के लिए विदेशी निवेशकों को 10 ही नहीं, 15, 30 व 40 साल तक के सरकारी बॉन्डों में निवेश की खुली छूट दे दी। एफआईआई को 12.5% लॉन्ग टर्म, 30% शॉर्ट टर्म और 20% विदहोल्डिंग टैक्स से मुक्त कर दिया। हालांकि सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने साफ कर दिया कि शेयर बाज़ार से भले ही सबसे ज्यादा विदेशी निवेश निकला हो, लेकिन वहां एफपीआई पर कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं हटाया जाएगा। रिजर्व बैंक ने अनिवासी भारतीयों के विदेशी मुद्रा बैंक डिपॉजिट (एफसीएनआर-बी) पर ब्याज दर 7% कर दी है। यह ब्याज विदेशी मुद्रा की रकम पर मिलेगी और पूरी तरह टैक्स-फ्री है। अनुमान है कि इससे देश में इस साल 30-40 अरब डॉलर आ सकते हैं। 2013-14 में रिजर्व बैंक को ऐसी ही स्कीम में 26 अरब डॉलर मिले थे। सरकार के नए कदमों से देश में कुल 60-80 अरब डॉलर आ सकते हैं। लेकिन एफडीआई और एफपीआई का क्या होगा? अब मंगलवार की दृष्टि…

यह कॉलम सब्सक्राइब करनेवाले पाठकों के लिए है.
'ट्रेडिंग-बुद्ध' अर्थकाम की प्रीमियम-सेवा का हिस्सा है। इसमें शेयर बाज़ार/निफ्टी की दशा-दिशा के साथ हर कारोबारी दिन ट्रेडिंग के लिए तीन शेयर अभ्यास और एक शेयर पूरी गणना के साथ पेश किया जाता है। यह टिप्स नहीं, बल्कि स्टॉक के चयन में मदद करने की सेवा है। इसमें इंट्रा-डे नहीं, बल्कि स्विंग ट्रेड (3-5 दिन), मोमेंटम ट्रेड (10-15 दिन) या पोजिशन ट्रेड (2-3 माह) के जरिए 5-10 फीसदी कमाने की सलाह होती है। साथ में रविवार को बाज़ार के बंद रहने पर 'तथास्तु' के अंतर्गत हम अलग से किसी एक कंपनी में लंबे समय (एक साल से 5 साल) के निवेश की विस्तृत सलाह देते हैं। इस कॉलम को पूरा पढ़ने के लिए आपको यह सेवा सब्सक्राइब करनी होगी। सब्सक्राइब करने से पहले शर्तें और प्लान व भुगतान के तरीके पढ़ लें। या, सीधे यहां जाइए।
अगर आप मौजूदा सब्सक्राइबर हैं तो यहां लॉगिन करें...

Existing Users Log In
   
New User Registration
Please indicate that you agree to the Terms of Service *
captcha
*Required field