देश में जितनी विदेशी मुद्रा आ रही है, उससे कहीं ज्यादा निकल रही है। रिजर्व बैंक के ताज़ा डेटा के मुताबिक इस साल मार्च अंत से 12 जून तक हमारा विदेशी मुद्रा भंडार 19.483 अरब डॉलर घटकर 671.625 अरब डॉलर रह गया। इसी साल 27 फरवरी को विदेशी मुद्रा भंडार 728.49 अरब डॉलर के रिकॉड स्तर पर पहुंच गया था। उसके बाद से बराबर गिर रहा है। ऐसे में सरकार को देश में विदेशी मुद्रा खींचने के कारगर उपाय करने होंगे। लेकिन वो सरकारी बॉन्डों में एफआईआई या विदेशी संस्थाओं के निवेश पर कैपिटल गेन्स व विदहोल्डिंग टैक्स खत्म कर और अनिवासी भारतीयों की जमा पर ब्याज दर बढ़ाकर शांत बैठ गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कहती हैं कि विदेशी पूंजी खींचने के और भी उपाय किए जाने हैं। लेकिन कब? वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल के स्लोवाकिया और फांस यात्रा के दौरान वहां रह रहे भारतीयों के सम्मेलन में मोदी-मोदी के नारे लगवाकर अपनी 12 साल की सरकार की उपलब्धियां गिनाते रहे, जिसे हमारे न्यूज़ चैनलों ने रात 10 बजे भी लाइव टेलिकास्ट किया। लेकिन पेरिस में उद्योगपतियों के बीच तमाम हवाबाज़ियों के बीच बस इतना पता सके कि भारत में निवेश करने पर उनको 50 अरब डॉलर से ज्यादा का ‘प्रोत्साहन’ मिलेगा। मोदी जी! लूटो और लुटाओ की इस नीति से कभी नहीं आएगी विदेशी पूंजी। अब सोमवार का व्योम…
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