अमेरिका हर तरह के आर्थिक संकट से निपटने के लिए मुफ्त में नोट छापकर सिस्टम में डालता रहा। साल 2008 के वित्तीय संकट के बाद उसने ऐसा किया। फिर यही काम कोरोना महामारी के दौरान किया। अमेरिका में जितने डॉलर है, उसका लगभग 20% हिस्सा केवल साल 2020 में छापा गया। अमेरिका व अन्य विकसित देशों के केंद्रीय बैंकों को करना यह चाहिए था कि सिस्टम में डाले गए अतिरिक्त नोट संकट हल्का होते ही वापस खींचते रहते। लेकिन उन्होंने समय रहते ऐसा नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि इलाज मर्ज से भी बदतर बन गया। अमेरिका को चार दशकों की सबसे भयंकर मुद्रास्फीति ने ग्रस लिया। ऊपर से रूस-यूक्रेन युद्ध कोढ़ में खाज बन गया। किसी को इस विकट संकट से निकलने की राह नहीं सूझ रही। अब सोमवार का व्योम…
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