लहर क्यों नहीं आती टेक्नोफैब में!

बाजार पर आज कम से कम दोपहर तक हाउसिंग लोन घोटाले का असर छाया रहेगा। लेकिन लंबे निवेश की चाह में लगे लोगों के लिए यह घोटाला कोई ऐसा मसला नहीं है जिससे डरकर भाग लिया जाए। गिरावट के ऐसे मौके तो अच्छे शेयरों को सस्ते में पकड़ने के लिए ही होते हैं। ऐसा ही सस्ता शेयर है टेक्नोफैब इंजीनियरिंग का। उसे कल ही 30 करोड़ रुपए का नया ऑर्डर मिला है। इससे ठीक पंद्रह दिन पहले 10 नवंबर को उसे 128 करोड़ रुपए के नए ऑर्डर मिले थे। कुल मिलाकर उसे इस साल 342 करोड़ रुपए के ऑर्डर मिल चुके हैं, जबकि 782 करोड़ रुपए के ऑर्डर उसके पास पहले से हैं।

यह 38 साल पुरानी इंजीनियरिंग व कंस्ट्रक्शन कंपनी है। वो एनटीपीसी, बीएचईएल, रिलायंस, मारुति, नाल्को, सेल, इफ्को, एनएमडीसी और इंडियन ऑयल जैसी कंपनियों के लिए काम कर चुकी है। कंपनी कई अफ्रीकी देशों में भी सक्रिय है। उसकी आय पर करीब 40 फीसदी हिस्सा विदेशी कामकाज से आता है। सितंबर 2010 की तिमाही में उसने 73.19 करोड़ रुपए की आय पर 6.51 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था, जबकि सितंबर 2009 की तिमाही में उसकी आय 40.15 करोड़ और शुद्ध लाभ 3.93 करोड़ रुपए था। इस तरह सालाना आधार पर उसकी आय में 82.29 फीसदी और शुद्ध लाभ में 65.65 फीसदी की वृद्धि हुई है।

लेकिन लगता नहीं कि अच्छे खबरों का सीधा असर कंपनी के शेयरों (बीएसई – 533216, एनएसई – TECHNOFAB) पर पड़ता है। उसने 1 नवंबर को सितंबर तिमाही के शानदार नतीजे घोषित किए। शेयर 222-23 रुपए पर ठंडा पड़ा रहा। 10 नवंबर को उसे 128 करोड़ रुपए के नए ऑर्डर मिले। शेयर वहीं 220-21 पर अटका रहा। कल उसे 30 करोड़ का नया ऑर्डर मिला। लेकिन उसका शेयर 8.06 फीसदी गिरकर 183.05 पर पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स में आई गिरावट केवल 1.18 फीसदी थी। ऐसे में टेक्नोफैब इंजीनियरिंग का शेयर फटाफट बढ़ ही जाएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। पर कंपनी मजूबत आधार पर खड़ी है, इसकी गांरटी जरूर है।

कंपनी की प्रति शेयर बुक वैल्यू 125.29 रुपए है। उसका ठीक पिछले बारह महीनों (टीटीएम) का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 18.20 रुपए है। इस तरह उसका शेयर अभी केवल 10.06 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। जाहिर है इसमें बढ़त की भरपूर गुंजाइश है। बीते वित्त वर्ष में उसने 200.37 करोड़ की आय पर 19.09 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। इस साल तो उसके पास अभी से 342 करोड़ रुपए के नए ऑर्डर हैं। ऐसे में पूरी संभावना है कि उसका कारोबार पहले के काफी बेहतर रहेगा। वैसे भी, यह शेयर इसी साल 20 जुलाई को ऊपर में 310.75 रुपए तक जा चुका है। इसलिए साल भर में यह इस स्तर तो पहुंच ही सकता है।

कंपनी की इक्विटी 10.49 करोड़ रुपए है जो दस रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में विभाजित है। इसमें प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 36.8 फीसदी है, जबकि एफआईआई के पास कंपनी के 6.75 फीसदी और डीआईआई के पास 6.51 फीसदी शेयर हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.