बुद्धिमान की बुद्धिमानी
आप बुद्धिमान हैं, अच्छी बात है। लेकिन क्या आप बुद्धिमानी से दुनिया को देख रहे हैं? शायद नहीं, क्योंकि इसके लिए काफी अध्ययन, मनन और ज्ञान की जरूरत है। इसलिए बुद्धिमान होने से ज्यादा महत्वपूर्ण है जीवन को बुद्धिमानी से देखना व जीना।और भीऔर भी
निर्माण लागत बढ़ने से रीयल एस्टेट दबाव में
पिछले दो साल में भवन निर्माण की लागत 18 फीसदी बढ़ गई है। यह कहना है रीयल एस्टेट क्षेत्र पर नजर रखने वाली ऑनलाइन डाटा व विश्लेषण फर्म प्रॉपइक्विटी का। इससे रीयल एस्टेट के कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। प्रोपइक्विटी के एक अध्ययन मुताबिक 2009 से 2011 के बीच सीमेंट, स्टील, मजदूरी और ईंट जैसी चार प्रमुख चीजों के महंगा होने से निर्माण लागत में कुल 18 फीसदी वृद्धि हो गई है। इस तरह लागत बढ़ जानेऔरऔर भी
हर दिन का चक्र
खिड़की-दरवाजे सारे बंद। फिर भी छिपे से छिपे कोने तक में धूल आ ही जाती है। धूल न भी दिखे तो लाखों जीवाणु घर किए रहते हैं। इसलिए हर दिन सफाई जरूरी है। हर दिन मनन जरूरी है, अध्ययन जरूरी है।और भीऔर भी
एकल परिवार बने बुजुर्गों की मुसीबत
एकल परिवारों के बढ़ते चलन और इससे बुजुर्गों पर पड़ने वाले असर के बारे में किए गए एक ताजा अध्ययन में बताया गया है कि एकल परिवार बुजुर्गों के मानवाधिकार हनन का कारण हैं। इस अध्ययन में कहा गया है कि एकल परिवारों के बढ़ते चलन के कारण वरिष्ठ नागरिक अकेले जिंदगी बिताने के लिए बाध्य होते हैं जिसके परिणामस्वरूप उनकी भावनात्मक और शारीरिक सेहत पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिएऔरऔर भी
ऑफिस में ज्यादा रुकना दिल के लिए घातक
ऑफिस में देर तक काम करने वाले अब सावधान हो जाएं। एक नए अध्ययन में पता चला है कि दफ्तरोम में निर्धारित से अधिक समय तक काम करने से कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है और दिल का दौरा पड़ने की नौबत आ सकती है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में किए गए एक नए अध्ययन के मुताबिक, सात या आठ घंटे काम करने वालों के मुकाबले जो व्यक्ति 11 घंटे से अधिक समय तक कामऔरऔर भी
आकाश एक, क्षितिज अनेक
हम सब रहते तो एक आकाश के नीचे हैं। लेकिन सबका क्षितिज एक नहीं होता। कोई कहीं तक देख पाता है तो कोई कहीं तक। हम चाहें तो अध्ययन, चिंतन व मनन से अपना क्षितिज बढ़ा सकते हैं।और भीऔर भी
बढ़ रहे हैं देश में ज्यादा आय वाले परिवार
पिछले आठ सालों में देश की कुल आबादी में निम्न आय वाले परिवारों का हिस्सा घटा है और उच्च आय वाले परिवारों का हिस्सा बढ़ा है। एनसीएईआर के एक ताजा अध्ययन के अनुसार 2001-02 में निम्न आय वाले परिवारों का हिस्सा 34.6 फीसदी था, जो 2009-10 में घटकर 17.9 फीसदी रह गया। इसी दौरान मध्यम आय वाले परिवारों की संख्या 58 फीसदी (14.07 करोड़) से बढ़कर 61.6 फीसदी (22.84 करोड़) हो गई। साथ ही उच्च आय वर्गऔरऔर भी



