एकल परिवार बने बुजुर्गों की मुसीबत

एकल परिवारों के बढ़ते चलन और इससे बुजुर्गों पर पड़ने वाले असर के बारे में किए गए एक ताजा अध्ययन में बताया गया है कि एकल परिवार बुजुर्गों के मानवाधिकार हनन का कारण हैं।

इस अध्ययन में कहा गया है कि एकल परिवारों के बढ़ते चलन के कारण वरिष्ठ नागरिक अकेले जिंदगी बिताने के लिए बाध्य होते हैं जिसके परिणामस्वरूप उनकी भावनात्मक और शारीरिक सेहत पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए काम करने वाले दिल्ली स्थित एक गैर सरकारी समूह एजवेल फाउंडेशन द्वारा किए गए इस अध्ययन में कहा गया है कि वरिष्ठ नागरिकों के बीच अपने मानवाधिकारों को लेकर कम जागरूकता होती है और ज्यादा उम्र के कारण उन्हें भेदभाव का दंश भी झेलना पड़ता है।

संस्था के संस्थापक हिमांशु रथ ने कहा ‘‘आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई वरिष्ठ नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताओं और अधिकारों का ध्यान नहीं रखा जाता। सामाजिक तिरस्कार, अकेलापन, अलगाव और बढ़ती उम्र के कारण उपेक्षा के चलते वरिष्ठ नागरिकों के मानवाधिकारों का हनन होता है। हमारे अध्ययन का उद्देश्य जमीनी हकीकत का पता लगाना और इसको दुरुस्त करने का प्रयास करना है।’’

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