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study

itihaas hai badalaav

इतिहास है बदलाव का अध्ययन

2025-12-28
By: अनिल रघुराज
On: December 28, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

man ki bagdor

मन की बागडोर

2025-08-13
By: अनिल रघुराज
On: August 13, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

desh mulk rashtra

देश, मुल्क और राष्ट्र

2025-05-06
By: अनिल रघुराज
On: May 6, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

man ka aaytan

मन का आयतन

2025-05-05
By: अनिल रघुराज
On: May 5, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

svang nahi adhyatm

स्वांग नहीं अध्यात्म

2025-02-12
By: अनिल रघुराज
On: February 12, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

jhuth ki karmanasha

झूठ की कर्मनाशा बनाम सत्य की गंगा

2025-01-29
By: अनिल रघुराज
On: January 29, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

mulya na jay

भाव जाए, मूल्य नहीं

2025-01-28
By: अनिल रघुराज
On: January 28, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

nabj asli samasya ki

नब्ज़ असली समस्या की

2025-01-27
By: अनिल रघुराज
On: January 27, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

bolna jaroori hai

बोलना ज़रूरी है

2025-01-26
By: अनिल रघुराज
On: January 26, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

itihaas business nahi

इतिहास बिजनेस नहीं

2025-01-25
By: अनिल रघुराज
On: January 25, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

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निवेश – तथास्तु

  • जीडीपी बढ़ा, बाज़ार डूबा, गर्ग-गर्ग भिड़े!
    6 Sep 2026

    हफ्ते के पहले दिन सोमवार को घोषित हुआ कि देश के जीडीपी की रीयल या सच्ची विकास दर, महंगाई के असर को खत्म करने के बाद 7.8% रही है। मतलब भारतीय अर्थव्यवस्था पश्चिम एशिया के संकट के बावजूद बमबम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसे निजी उपलब्धि बताकर अपनी पीठ थपथपा रहे है। फिर भी हमारा शेयर बाज़ार मायूसी में जकड़ा रहा। हफ्ते के आखिरी ट्रेडिंग दिन, शुक्रवार तक निफ्टी-50 सूचकांक सोमवार के 24,080.40 से […]

September 2026
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क्या आप जानते हैं?

  • हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

    इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर जितने भी 69,963 किस्म के रीढ़वाले या कशेरुकी (vertebrates) जीव-जन्तु हैं, उन्होंने देखने की क्षमता वाली अपनी आंखें एक बैक्टीरिया के जीन से हासिल की है। यह सच अप्रैल 2023 में पीएनएएस (प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज) की …

अपनों से अपनी बात

  • साल में 41-112%, मिले है सिर्फ यहां!

    भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आगे भी बढ़ेगी। लेकिन कहा जा रहा है कि इसका लाभ आम आदमी को पूरा नहीं मिलता। अमीर-गरीब की खाईं बढ़ रही है। बाज़ार को आंख मूंदकर गालियां दी जा रही हैं। लेकिन बाज़ार सचेत लोगों के लिए आय और दौलत के सृजन ही नहीं, वितरण का काम भी करता है। हमने तथास्तु सेवा इसीलिए शुरू की है ताकि अर्थव्यवस्था, खासकर कंपनियों के बढ़ने का लाभ निपट गरीबी से ऊपर रहनेवाले लोगों तक पहुंचाया जा सके। वे जिन्हें बैंक बहुत हुआ तो 9 प्रतिशत देता है, जबकि वास्तविक महंगाई की दर 10 प्रतिशत से ऊपर रहती है। वे भागकर जाते हैं सोने और रीयल एस्टेट में चले जाते हैं तो उनकी बचत लॉक हो जाती है। देश के काम नहीं आती। खुद उनके कितने काम आएगी, यह भी पक्का नहीं। जो पिछले साढ़े चार सालों से अर्थकाम से जुड़े हैं, वे हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से भलीभांति वाकिफ हैं। शुरू में हम भी कच्चे थे तो बाज़ार के उस्तादों के जाल में फंस गए। गलतियां कीं। लेकिन जैसे ही समझ में आया, खटाक से उनसे किनारा कस लिया। करीब सवा साल पहले से नए सिरे से शुरू किया तो मजबूत आधार और गहन रिसर्च के साथ। उसी का नतीजा है कि हमारी सलाहें शानदार-जानदार रिटर्न दे रही हैं। पिछली बार हमने अगस्त 2013 से अगस्त 2014 तक का लेखाजोखा रखा था। अब सितंबर 2013 से सितंबर 2014 की बानगी पेश है। सितंबर 2013 में पांच रविवार थे तो पांच कंपनियां। आप नीचे की सारिणी से देख सकते हैं कि पांच में चार ने अपना (तीन से पांच साल का) लक्ष्य साल भर में ही पूरा कर लिया है, जबकि एक कंपनी 84.57 प्रतिशत रिटर्न के साथ लक्ष्य से ज़रा-सा पीछे है। तारीख कंपनी तब का भाव समय लक्ष्य 30/09/14 का भाव रिटर्न (%) 01/09/13 डॉ. रेड्डीज़ लैब 2292.90 3 साल 2815 3229.60 40.85 08/09/13 एचडीएफसी बैंक 616.20 3 साल 850 872.65 41.62 15/09/13 अतुल ऑटो 173.65 5 साल 260 367.90 111.86 22/09/13 कमिन्स इंडिया 409.25 3 साल 474 671.05 63.97 29/09/13 नवनीत एजुकेशन 53.15 3 साल 110 98.10 84.57   यहां यह भी गौर करने की बात है कि हम आमतौर पर हर महीने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप का संतुलन बनाकर चलते हैं। यह भी बताते हैं कि कहां पर एंट्री करें और आपके पास कुल एक लाख रुपए हों तो उस हफ्ते की कंपनी में कितना लगाना चाहिए, उसके कितने शेयर खरीदने चाहिए। मसलन, सितंबर 2013 में हमने तीन लार्जकैप, एक मिडकैप और एक स्मॉल कैप कंपनी आपके निवेश के लिए पेश की थी। इसमें से लार्ज कैप कंपनियों में डॉ. रेड्डीज़ लैब का शेयर लक्ष्य हासिल कर चुका है और यही नहीं, 24 सितंबर 2014 को 3356.60 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर पकड़ चुका है। एचडीएफसी बैंक भी लक्ष्य हासिल करने के साथ ही 30 सितंबर 2014 को 879.80 रुपए का शिखर हासिल कर चुका है। कमिन्स इंडिया भी लक्ष्य हासिल कर लेने के साथ 4 सितंबर 2014 को 720 रुपए पर 52 हफ्ते का शीर्ष छू चुका है। स्मॉल कैप की श्रेणी वाला स्टॉक अतुल ऑटो साल भर में 111.86 प्रतिशत का रिटर्न देकर लक्ष्य के काफी आगे निकल चुका है। यही नहीं, 12 सितंबर 2014 को वो 446.90 रुपए का शिखर भी चूम चुका है। बाकी बची मिडकैप कंपनी नवनीत एजुकेशन में तीन साल का लक्ष्य 110 रुपए था। उसका शेयर 10 सितंबर 2014 को 104.90 रुपए तक जाने के बाद 30 सितंबर को 2014 को 98.10 रुपए पर था, जो साल का 84.97 रिटर्न दिखाता है। आप ऊपर की सारिणी से देख सकते हैं कि 1 सितंबर 2013 से 30 सितंबर 2014 तक की अवधि में तथास्तु में बताई पांच कंपनियों ने न्यूनतम 40.85 प्रतिशत और अधिकतम 111.86 प्रतिशत रिटर्न दिया है। इसी दौरान एनएसई निफ्टी ने 5550.75 से 7964.80 तक जाकर 43.49 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स ने 18,886.13 से 26,567.99 तक पहुंचकर 40.67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दोस्तों! पुरानी बात फिर दोहरा रहा हूं कि मात्र 200 रुपए में अगर कोई सवा आपको बाज़ार से ज्यादा रिटर्न दिला रही है, वो भी आपको आपकी भाषा में अच्छी तरह कंपनी की जानकारी देकर तो क्या इस सेवा को आपका और आपको इस सेवा का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बढ़ रही अर्थव्यवस्था का लाभ उठाइए। यकीन मानिए कि मोदी की सरकार बस एक निमित्त मात्र है। वो रहे या कोई और आए, अगले दस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जबरदस्त प्रगति के साल होने जा रहे हैं। इस दौरान एक साल में दोगुना ही नहीं, दस साल में अपनी बचत से दस गुना दौलत बनाने के मौके बहुत सारे आएंगे। दूसरे आपको बस उल्लू बनाएंगे। केवल हम ही हैं जो पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से आपके लिए निवेश के हर रविवार को शानदार मौके लेकर आते रहेंगे। तुलसीदास की चौपाई याद कीजिए – सकल पदारथ है जन मांही, कर्महीन नर पावत नाहीं। आपके हिस्से का कुछ कर्म हम कर दे रहे हैं। बाकी तो आपको ही करना पड़ेगा। इसलिए…. सोचिए। समझिए। फैसला कीजिए। तथास्तु!!!

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ट्रेडिंग – बुद्ध

  • कल का बाज़ार मूल्य आज बदल डाला!
    8 Sep 2026

    बाज़ार में मूल्य समय के साथ बाद में घट-बढ़ सकते हैं। लेकिन एक बार बाज़ार के किसी मूल्य पर समय का ठप्पा लग गया तो उसे बाद की किसी तारीख में संशोधित करके घटाया-बढ़ाया नहीं जा सकता। मान लीजिए कि आपने जून 2025 में एक किलो घी 500 रुपए में खरीदा। जून 2026 में उसी घी के दाम 550 रुपए हो गए तो 10% की बढ़ोतरी हो गई। ऐसा हो नहीं सकता कि घी का जो बाज़ार मूल्य 500 रुपए प्रति किलो था, उसे आज आप जबरन घटाकर 485 रुपए बता दें और कह दें कि पिछले साल के मुकाबले बाज़ार मूल्य में बढ़ोतरी 10% नहीं, 13.40% हुई है। लेकिन मोदी सरकार के अर्थशास्त्री भारतीय अवाम को यही घुट्टी पिलाने में लगे हैं। उनका कहना है कि जीडीपी की पुरानी सीरीज़ में 2025-26 की पहली तिमाही में बाज़ार मूल्य पर देश का जो जीडीपी था, वो असल में ₹86.05 लाख करोड़ नहीं, बल्कि ₹80 लाख करोड़ था। ऐसा कैसे हो सकता है कि पिछले साल का बाज़ार मूल्य आप टाइम-मशीन पर पीछे जाकर बदल दें? आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने पर रीयल जीडीपी और रीयल विकास दर ज़रूर बदल जाएगी। लेकिन कल के बाज़ार मूल्य को कोई आज कैसे बदल सकता है? मगर, मोदी सरकार 2022-23 से ही नॉमिनल या बाज़ार मूल्य पर पहले निकाले गए जीडीपी को बाद में घटाती रही है। आखिर क्यों? अब मंगलवार की दृष्टि…

जानिए

  • ज़ीरो-सम गेम नहीं है यह
  • ईटीएफ: चलो बाजार खरीद लें
  • मायने आईपीओ ग्रेडिंग के
  • जवाब कमोडिटी बाजार के

बूझिए

  • ओपन ऑफर, बायबैक, डीलिस्टिंग
  • इश्यू मूल्य और बुक बिल्डिंग
  • गुत्थी ऋण बाजार की
  • यह कासा बला क्या है?

आज़माइए

  • मोटामोटी दस बातें शेयरों की
  • गोल्ड ईटीएफ एक, दाम अनेक
  • न करें कम एनएवी का लालच
  • फायदे म्यूचुअल फंड निवेश के

क्या आप जानते हैं?

हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर

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