बाज़ार का मूल काम है मांग और सप्लाई के संतुलन के बीच भावों की खोज। लेकिन बाज़ार उतना ही कुशल होता है जितना ज्यादा उसमें भाग लेनेवाले होते हैं। अमेरिका, यूरोप व जापान जैसे विकसित देशों में लगभग आधी आबादी शेयर बाज़ार से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़ी है। वहीं, भारत में म्यूचुअल फंड व सीधे शेयरों में निवेश करनेवाले बमुश्किल 5% होंगे। इसलिए अपना बाज़ार उतना निष्पक्ष व कुशल नहीं है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

अन्य बाज़ारों की तरह शेयर बाज़ार में भी भाव मांग और सप्लाई से निर्धारित होते हैं। खबरों का असर यकीनन उस पर होता है। लेकिन यह इससे तय होता है कि शेयर बाज़ार के बड़े खिलाड़ियों पर उन खबरों का क्या असर पड़ा है। चूंकि बाज़ार में भांति-भांति के खिलाड़ी सक्रिय हैं, कोई कहीं तो कहीं से जुड़ा है, इसलिए इनका सम्मिलित असर क्या होगा, यह पहले से निकाल पाना बड़ा मुश्किल है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार अपने ही तर्क से चलता है। मसलन, लग रहा था कि गुरुवार शाम को बाज़ार बंद होने के बाद जीडीपी की विकास दर 5.7% तक सिमटने का आंकड़ा आया तो शुक्रवार को निश्चित रूप में बाज़ार गिरेगा। लेकिन वो खुलने के चंद मिनट बाद बढ़ने लगा और अंत में अच्छा-खासा बढ़कर बंद हुआ। वजह ऑटोमोबाइल की बढ़ी बिक्री को बताया गया। लेकिन ऑटो से ज्यादा तो फार्मा व मीडिया सूचकांक बढ़ा था। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

आम हिंदुस्तानी के पास क्या है? हुनर और अपनी मेहनत। दो-चार एकड़ खेत हैं तो उससे गुजारे से ज्यादा कुछ नहीं चलता। करीब 60% लोग खुशकिस्मत हैं जिन्हें साल भर काम मिल पाता है। बाकी 40% या तो बेरोज़गार हैं या साल में कुछ ही महीने काम पाते हैं। जाहिर है कि अपने यहां शेयर बाज़ार मुठ्ठीभर लोगों के लिए है। इसे बढ़ाना है तो काम-धंधे और समृद्धि को बढ़ाना होगा। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अगर आपका दिमाग बराबर इसी कयासबाज़ी के इर्दगिर्द घूमता रहता है कि बाज़ार कहां जाएगा तो अभी तक आप ट्रेडिंग करने के काबिल नहीं बने हैं। बाहर से तमाशा देखने और मौज करनेवालों के लिए यह बड़ा मजेदार सवाल है। वे हर किसी से पूछते रहते हैं कि निफ्टी कहां जाएगा। कोई पूछे तो कह दीजिए कि निफ्टी 9500 तक गिर सकता है। वैसे भी जीडीपी पहली तिमाही में मात्र 5.7% बढ़ा है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

आज अर्थजगत और शेयर बाज़ार के लिए बड़ी खबरों का दिन है। महीने का आखिरी गुरुवार होने के नाते अगस्त के डेरिवेटिव सौदों की एक्पायरी का दिन है। दूसरे, आज बाज़ार बंद होने के बाद शाम को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी की विकास दर के आंकड़े आएंगे। यह आंकड़े काफी अहम हैं क्योंकि मार्च तिमाही में अर्थव्यवस्था मात्र 6.1% बढ़ी थी। कहीं हालत और ज्यादा खराब न हो जाए। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

मुंबई बारिश से सराबोर है। लेकिन बाज़ार का शोर बदस्तूर जारी है। इस शोर में सच तक पहुंचना भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा काम है। ऐसे में हमें सरकार या कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट की थाह लेनी पड़ती है। साथ ही चूंकि सच पका-पकाया नहीं मिलता, इसलिए हमें विश्लेषण का सहारा लेना पड़ता है। दूसरे के विश्लेषण में पक्षधरता होती है, इसलिए हमें विश्लेषण की अपनी क्षमता विकसित करनी पड़ती है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

किसी सार्थक फैसले के लिए सच जानना बहुत ज़रूरी है। लेकिन सच तक पहुंचने के लिए सही सूचनाओं या खबरों का मिलना आवश्यक है। मुश्किल यह है कि जब मीडिया अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा हो, आम अखबार व न्यूज़ चैनल राजनीतिक दलों और बिजनेस अखबार व चैनल कंपनियों के भोंपू बन गए हों, तब सच्चाई तक कैसे पहुंचा जाए। शुक्र है कि वेब मीडिया का एक हिस्सा अभी निष्पक्ष बना हुआ है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

सुबह से शाम ही नहीं, देर रात तक खबरों की बमबारी। पहले मामला अखबार तक सीमित था। अब चौबीस घंटों के न्यूज़ चैनल हमेशा ब्रेकिंग न्यूज़ परोसते रहते हैं। उनका मकसद हमें खबर देना नहीं, बल्कि हमारा ध्यान खींचना होता है ताकि हम ज्यादा से ज्यादा संख्या में उनके कार्यक्रम देखें, उनकी टीआरपी बढ़े और उन्हें ज्यादा व महंगे विज्ञापन मिलें। हमें पता भी नहीं चलता कि सच क्या है और झूठ क्या। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार जब चढ़ रहा होता है तब आम निवेशक अक्सर अच्छे स्टॉक्स को बेचकर फायदा कमा लेते हैं, जबकि बुरे स्टॉक्स से चिपके रहते हैं, इस उम्मीद में कि तेज़ी की गंगा में वो भी कुछ फायदा दिला देंगे। लेकिन सही सोच है अच्छे व अच्छाई को धारण करो, बुरे व बुराई से निजात पाओ। हमें निवेश करते वक्त बुरे धन, बुरी एकाउंटिंग और बुरे बिजनेस से दूर रहना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी