बाज़ार में जब हम गलत साबित होते हैं तो इससे हमारा कुछ घटता नहीं। भले ही स्टॉप-लॉस थोड़ा घाटा लगा दे। लेकिन सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि हमारा अहं पहले से छोटा पड़ जाता है। यह अहं छोटा पड़ते-पड़ते जिस दिन एकदम खत्म हो जाता है, शून्य हो जाता है, उसी दिन से वित्तीय बाज़ार में हमारी कमाई की राह खुलती है। अहं घर पर चलता है, बाज़ार में कतई नहीं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार की संभवतः सबसे बड़ी सीख है विनम्रता। वह हमें आईना दिखाता है। यह भी सिखाता है कि हम दूसरों की आंख में आंख डालकर कह सकें कि हां, मैं गलत था। यहां अपनी गलती माननेवाले जीतते हैं। वहीं, जो अहंकारवश जिद पकड़े रहते हैं, बाज़ार उनकी सारी हेंकड़ी भुला लेता है। जो बुद्धिजीवी बाज़ार के बजाय सत्ता की ताकत पर भरोसा करते हैं, वे इतिहास के कूड़ेदान में जाने को अभिशप्त हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार की खूबसूरती यह है कि वो पूरी तरह स्वायत्त है। वह किसी व्यक्ति की छोड़िए, ताकतवर से ताकतवर सरकार तक का हुक्म नहीं मानता। बाज़ार से फ्रॉड करने वाले देर-सबेर धरे जाते हैं। देश या विदेश, कहीं इसका अपवाद नहीं। यह फेसबुक या ट्विटर जैसा नहीं कि आप मुफ्त में बढ़ते और फैलते चले जाएं। बाज़ार में अनुभव व ज्ञान हासिल करने की कीमत हर किसी को नुकसान उठाकर चुकानी पड़ती है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार बड़ा निर्मम और उदार गुरु है। उदार इसलिए क्योंकि वो हर पल कुछ न कुछ नया सिखाता रहता है। इस सीख में अनेक ऐसी अहम बातें होती हैं जिन्हें आप जीवन के दूसरे क्षेत्रों में भी अपना सकते हैं। निर्मम इस मायने में कि आपने सीखा नहीं तो वह आपको बरबाद कर सकता है। नहीं सीखने पर एक दिन आप पाई-पाई को मोहताज हो जाएंगे और वो अपनी रौ में चलता जाएगा। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

पिछले दो हफ्ते में निफ्टी का 2.27% गिरकर 10,000 से नीचे आ जाना लंबे समय के निवेशकों के लिए सुखद है। गुब्बारे का पिचकना अच्छा है। कारण, सूचकांक में शामिल हर पांच में कम से कम दो कंपनियों की वित्तीय सेहत खराब है। कर्ज की फांस उन्हें दबोचे हुए है। ऐसे में चढ़े बाज़ार के भ्रम में नहीं आना चाहिए। निवेश तभी करें, जब उसमें रिटर्न मिलने की पूरी गुंजाइश हो। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

रुपया, अमेरिकी डॉलर या यूरोपीय यूरो। अपने-आप में इन मुद्राओं का कोई मूल्य नहीं। वास्तव में वो महज कागज का टुकड़ा हैं, माया हैं। उनका मूल्य इससे बनता है कि उनमें माल या सेवा खरीदने की कितनी औकात है। इसी तरह कंपनी में निवेश करते वक्त हमें सिर्फ यही नहीं देखना चाहिए कि उसके शेयर का भाव क्या है, बल्कि यह भी कि उसकी औकात या मूल्य क्या है। आज पेश है तथास्तु में एक मूल्यवती कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के साथ आज क्यों न कुछ अपनी और देश की बात कर लें। यह महीना असल में बड़ा खास है। 9 अगस्त को ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ व 15 अगस्त को आज़ादी की 70वीं वर्षगांठ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से बोलेंगे तीसरी बार। अर्थव्यवस्था ठीक, पर अपग्रेड ज़रूरी। हम भी करेंगे तकनीकी व संपादकीय अपग्रेड। इसलिए 6 ट्रेडिंग सत्रों की छुट्टी। अगला कॉलम आएगा सोमवार, 21 अगस्त को। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में जो 5% ट्रेडर कामयाब होते हैं, वे वहां खरीदते हैं जहां से गिरने की प्रायिकता न्यूनतम और बढ़ने की प्रायिकता अधिकतम होती है। इसी तरह वे वहां पर बेचकर निकल जाते हैं जहां बढ़ने की प्रायिकता न्यूनतम और गिरने की प्रायिकता अधिकतम होती है। इन बिंदुओं का फैसला वे पिछले डेटा के मद्देनज़र डिमांड व सप्लाई ज़ोन निकालकर करते हैं। वे गलत साबित होते हैं तो कम घाटा खाते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग के दो अकाट्य सच अमूमन हम स्वीकार नहीं कर पाते। पहला यह कि सारी तैयारियों के बावजूद यहां परिणाम का कोई भरोसा नहीं। यहां सारा खेल अनिश्चितता का है। इसे कोई नहीं बांध सकता। दूसरा सच यह कि यहां उस्तादों के लिए भी घाटे से बचना नामुमकिन है। यहां सफल ट्रेडर वही है जो जानता है कि ठीक से घाटा कैसे खाया जाए, घाटे को न्यूनतम कैसे रखा जाए। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

टमाटर वही, रुपया वही। लेकिन पहले सौ रुपए में दस किलो मिलता था, अब एक किलो। उपयोगिता वही, मूल्य वही। लेकिन भाव चढ़ गया है। मामला सीजनल है। अगले सीजन तक फिर उतर जाएगा। शेयर बाज़ार में बहुत से शेयरों का भी यही हाल है। ऐसे में हमें बहुत सावधानी से वही कंपनियां चुननी चाहिए जिनका मूल्य सीजनल न हो, बराबर चढ़ता रहे और भाव उसी हिसाब से बढ़ता रहे। तथास्तु में आज ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी