शेयर बाज़ार में लाखों सुलझे और अनुभवी ट्रेडर हैं। सबके पास कंप्यूटर, स्मार्ट-फोन व टैबलेट जैसे टूल्स हैं। अच्छी स्पीड का इंटरनेट कनेक्शन। चार्टिंग का बेहतरीन सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर का बड़ा-सा स्क्रीन। राकेश झुनझुनवाला ने तो पूरा कमरा ही बनवा रखा है जहां दीवार पर बड़ी-बड़ी स्क्रीन पर तमाम शेयरों की लाइव चाल दिखती रहती है। अल्गोरिदम का खेल भी ट्रेडरों का पता होता है। सभी दूसरे का धन खींचने में लगे हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के लिए यह संधि-सप्ताह है। चार दिन साल 2020 के। एक दिन साल 2021 का। चाहें तो पुरानी गलतियां पुराने साल में छोड़कर नए साल की नई शुरुआत इसी हफ्ते कर सकते हैं। याद रखें कि शेयर बाज़ार ऐसी जगह है जहां न्यूटन जैसे वैज्ञानिक भी गच्चा खाते रहे हैं। इसलिए ज़रूरी है कि हम न तो अपने भीतर हीनता-भाव रखें और न ही खुद के सर्वज्ञ होने का गुमान पालें। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

इस समय अपने शेयर बाज़ार का हाल बड़ा विचित्र है। जिन कंपनियों के शेयर पिछले कुछ महीनों में चढ़ गए, वे सब चढ़े ही जा रहे हैं, जबकि जिन कंपनियों के शेयर कोरोना के कहर में दबे रह गए, वे महीनों से सीमित दायरे में ही ऊपर-नीचे हो रहे हैं। अधिकांश आम से लेकर खास निवेशक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के पीछे भाग रहे हैं तो कोरोना की तात्कालिक मार की शिकार कंपनियों की तरफ कोई देख ही नहीं रहा। आज तथास्तु में सबकी नज़रों से ओझल ऐसी ही एक कंपनी…और भी

इस वक्त शेयर बाज़ार की हालत नाजुक है। अफवाह या किसी नकारात्मक खबर से उसे खुदा-न-खास्ता तगड़ा धक्का लगा तो संभालने के एफआईआई भी नहीं हैं। वे क्रिसमस की लंबी छुट्टियां मनाने निकल चुके हैं। सरकार किसान आंदोलन से परेशान है। वहीं, पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी सुस्त पड़ी है। पिछले कुछ महीनों में फ्रैंकलिन टेम्प्लेटन जैसे नामी म्यूचअल फंड और डेढ़ दर्जन ब्रोकरों के डिफॉल्ट हो गए। मगर सेबी शांत पड़ी रही। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

पिछले महीने लगातार दो बार वॉट्स-एप्प के ज़रिए अफवाह फैलाई गई कि निफ्टी व सेंसेक्स में शामिल बड़ी कंपनी के मालिक की सेहत बेहद नाज़ुक है। कंपनी ने इसका माकूल जवाब देकर अफवाह का समूल खात्मा कर दिया। पहले भी तेज़ी के दौर में अफवाहों से बाज़ार को गिराने की कोशिशें हो चुकी हैं। 1990 के दशक में तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे या खराब सेहत की अफवाहें फैलाई गई थीं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

ताश के पत्तों का महल बन चुके शेयर बाज़ार को झटका देश नहीं, विदेश से भी लग सकता है। पिछले हफ्ते तक वेब या सोशल मीडिया की अटकलबाज़ी चल रही थी। अब तो कोरोना के नए खतरनाक अवतार ने ब्रिटेन, इटली व नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों में धमक पैदा कर दी है। भारत समेत दुनिया के तमाम देशों ने ब्रिटेन से आनेवाली उड़ानें रद्द कर दी हैं। अफरातफरी का आलम गहराने लगा है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार हर दिन नए शिखर पर। निफ्टी 37.84 के रिकॉर्ड पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि सेंसेक्स 33.60 के पी/ई पर। एक रुपए के शुद्ध लाभ पर इतना दाम देने का कहीं कोई तुक या औचित्य नहीं दिखता। औसतन 20-22 का पी/ई अनुपात चलता है। लेकिन विदेशियों ने सस्ते धन से बाज़ार को पाटकर भयंकर असंतुलन पैदा कर दिया है। ऐसा असंतुलन, जिसमें जरा-सी अफवाह भयंकर अफरातफरी मचा सकती है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अच्छे निवेश के लिए कंपनी की मूलभूत मजबूती, ऋण का बोझ नगण्य या कम से कम होना, बिजनेस की भावी संभावना और प्रवर्तकों की ठीकठाक इक्विटी भागीदारी के साथ-साथ जरूरी है कि उसके शेयर अपेक्षाकृत सस्ते भाव पर उपलब्ध हों। इस शर्त को ‘मार्जिन ऑफ सेफ्टी’ भी कहते हैं। मगर, आज तो बाज़ार में जिसको देखो, वही चढ़ा हुआ है। ऐसे में ‘मार्जिन ऑफ सेफ्टी’ वाले स्टॉक्स खोजना बड़ी चुनौती है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अमूमन दिसंबर तेजड़ियों का महीना रहता है। लेकिन जनवरी के साथ ऐसा नहीं है। अबकी बार तो और भी नहीं। दुनिया में तमाम राजनीतिक घटनाक्रम आसन्न हैं जो वित्तीय जगत व बाज़ार को प्रभावित कर सकते हैं। जनवरी में यकीनन शेयर बाज़ार में वोल्यूम बढ़ जाएगा। इंट्रा-डे वोलैटिलिटी तो अब भी बढ़ी हुई है। लेकिन तब दिन-ब-दिन की वोलैटिलिटी भी वापस लौट आएगी। ट्रेडरों और निवेशकों को तब अपनी चौकसी बढ़ा देनी होगी। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

इतना निवेश कर चुकने के बाद विदेशी निवेशक इस महीने धीरे-धीरे सुस्ती ओढ़ते जा रहे हैं। इससे बाज़ार में नकदी या लिक्विडटी के कम होते जाने का रिस्क बढ़ता जा रहा है। कैश और डेरिवेटिव सेगमेंट में घटते वोल्यूम में यह दिखने भी लगा है। वैसे, हर साल दिसंबर में ऐसा होता रहता है। इससे बड़े ट्रेडरों को ऑर्डर पूरा करने में काफी दिक्कत होती है। लेकिन छोटों पर खास फर्क नहीं पड़ता। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी