विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने हमारे शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट में बजट के दिन 10,168.32 करोड़ रुपए और कल 13,585.57 करोड़ रुपए (दो दिन में 23,753.89 करोड़ रुपए) झोंके हैं। उन्होंने यह धन लगभग शून्य ब्याज पर उठाया है। वित्त मंत्री सीतारमण का नया बजट भी भरपूर उधारी पर टिका है। वित्त वर्ष 2021-22 में सरकार बाज़ार से 12 लाख करोड़ रुपए का भारी-भरकम उधार लेने जा रही है, जबकि टैक्स से 15.45 लाख करोड़ रुपए औरऔरऔर भी

बजट ने शेयर बाज़ार में जबरदस्त उन्माद पैदा कर दिया। सेंसेक्स 5% उछल गया। आखिर इस उन्माद का आधार क्या है? बजट का मूल स्वर तो राजनीति में बाज़ी मारने का है। जिन राज्यों में अगले साल तक चुनाव होने हैं, उनके लिए खास घोषणाएं की गई हैं। वित्त मंत्री के बजट भाषण में स्वास्थ्य पर खर्च 137% बढ़ाकर 2,23,846 करोड़ रुपए कर देने का दावा किया गया है। लेकिन बजट दस्तावेज में खर्च 82,445 करोड़ रुपए से घटाकर 74,602 करोड़ रुपए कर दिया गया है। अब मंगलवार की दृष्टि…और भी

आज 11 बजे से लोकसभा में वित्त मंत्री का बजट भाषण शुरू हो जाएगा। लेकिन दरअसल, शेयर बाज़ार के लिए आज बजट का नहीं, बेचने का दिन है। दुनिया भर के शेयर बाजारों में स्वीकृत मान्यता है कि उम्मीद पर खरीदो और खबर आने पर बेच दो। इसलिए समझदारी इसमें है कि जिन-जिन उम्मीदों पर ट्रेडरों ने पिछले 15-20 दिन में खरीद की हो, वे उम्मीदें आज पूरी हों या न हों, उन्हें बेचकर निकल जाना चाहिए।औरऔर भी

वित्त वर्ष 2019-20 में अर्थव्यवस्था मात्र 4% बढ़ी। यह 11 सालों की न्यूनतम दर है। बीता वित्त वर्ष 2020-21 कोरोना की भेंट चढ़ गया। नतीजतन, अर्थव्यवस्था 7% सिकुड़ सकती है। फिर भी पांच साल में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और नए वित्त वर्ष में 11% विकास दर का सब्ज़बाग! राजनीति में ऐसी झांकी चलती है, मगर अर्थनीति में नहीं। 11% नहीं, 12% बढ़ जाए, तब भी नए साल में अर्थव्यवस्था 2019-20 की तुलना में 4.16% ही बढेगी, जबकि बीच का एक साल स्वाहा। अब तथास्तु में आज की कंपनी…और भी

बजट से इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को कोई खास उम्मीद नहीं। बीएसई इंफास्ट्रक्चर सूचकांक का पी/ई अनुपात फिलहाल 15.32 है, जबकि सेंसेक्स का पी/ई अनुपात 31.96 पर। तम्बाकू, सिगरेट व शराब कंपनियों पर हर बजट में टैक्स बढ़ता है तो उनके शेयर घबराए-घबराए चल रहे हैं। साथ ही आम लोगों को 80-सी के तहत टैक्स राहत बढ़ने की उम्मीद है तो जीवन व स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के स्टॉक्स इधर मुस्करा रहे हैं। वैसे भी, इधर वर्क-टू-होम से घरेलू बचत बढ़ गई है। सोमवार को आ रहा है बजट। फिलहाल शुक्रवार का अभ्यास…और भी

बजट से कुछ खास पाने की उम्मीद में रीयल एस्टेट कंपनियों के शेयर भी पिछले दिनों बढ़ते गए हैं। कभी इंडियाबुल्स रीयल एस्टेट 12% बढ़ गया तो कभी ओबेरॉय रियल्टी और गोदरेज प्रॉपर्टीज़ 7-8% बढ़ गए। किसानों का मुद्दा गरम है तो उन्हें शांत करने के बहाने फर्टिलाइजर सब्सिडी बढ़ाई जा सकती है। इसी उम्मीद में कभी ग्रासिम बढ़ता है तो कभी कोरोमंडल इंटरनेशनल। फार्मा व हेल्थकेयर स्टॉक्स तो पिछले कई महीनों से बढ़े जा रहे हैं। जेरनिक दवा कंपनियों को बजट से विशेष उम्मीद है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…और भी

ऑक्सफैम की रिपोर्ट बताती है कि कोरोना प्रकोप के बीच मार्च 2020 में लॉकडाउन लगने के बाद देश के शीर्ष 100 अरबपतियों की आय 12,97,822 लाख करोड़ रुपए बढ़ गई। जब उद्योग व सेवा क्षेत्र की सारी गतिविधियां ठप थीं, तब आखिर इतना धन उनके पास आया कहां से, जिससे 13.8 करोड़ निर्धनतम भारतीयों को 94,045 रुपए का चेक मुफ्त में दिया जा सकता है? इस दौरान एफएमसीजी, दवा और ऑनलाइन रिटेल के अलावा केवल शेयर बाज़ार ही चल रहा था! कितना कमाया होगा बाज़ार से? अब बुधवार की बुद्धि…और भी

अगले सोमवार को बजट का दिन है। फिलहाल बाज़ार में कयास जारी हैं कि उसमें क्या-क्या हो सकता है। भांति-भांति की उम्मीदें तैर रही हैं। मसलन यह कि इस बार ऑटोमोबाइल उद्योग को खास राहत दी जा सकती है। इससे दोपहिया से लेकर कार व कमर्शियल वाहन बनानेवाली कंपनियों को फायदा होगा तो इनके शेयरों में जमकर खरीद हो रही है। नतीजतन, बीते हफ्ते 18 से 22 जनवरी के बीच निफ्टी ऑटो सूचकांक 5.57% बढ़ चुका है। बाज़ार इसी तरह बजट उम्मीदों की झांकी दिखाता है। अब सोमवार का व्योम…और भी

कस्टमाइजेशन का ज़माना है। उत्पाद व सेवाओं को ग्राहक की खास बुनावट व ज़रूरतों के हिसाब से ढाला जाता है। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग व निवेश में भी बिना हायतौबा मचाए कमाना है तो हमें अपने माफिक स्टॉक्स व कंपनियां चुननी होंगी। निवेश का पक्का फॉर्मूला है कि जिस कंपनी का धंधा, उसका बिजनेस मॉडल हमें अच्छी तरह समझ में आ रहा हो, उसी में धन लगाना चाहिए। किसी की नकल नहीं करनी चाहिए क्योंकि नकल मेंऔरऔर भी

सरकार के पास टैक्स का इतना टोंटा है कि बजट में उपहारों की बरसात नहीं कर सकतीं। उससे कर-मुक्त आय की सीमा बढ़ाने या टैक्स-रियायतों की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसके विपरीत सरकार कोरोना वैक्सीन का खर्चा निकालने के लिए किसी तरह का सेस ज़रूर लगा सकती है। असल में वह बुरी तरह घिर गई है। धन है नहीं, लेकिन धनवान दिखाना उसके लिए ज़रूरी है। इसलिए हवा-हवाई का अंदेशा ज्यादा है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी