आज का दिन शेयर बाजार में कत्लोगारद का दिन है। अमेरिका का संकट सारी दुनिया पर हावी है। मध्य-पूर्व के बाजारों में कुवैत में 2.51 फीसदी से लेकर इस्राइल की 6.59 फीसदी गिरावट ने झांकी दिखा दी है कि भारत व एशिया के बाजारों में क्या हो सकता है। हमारे पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में शेयर सूचकांक रविवार को बाजार खुले होने पर 2.2 फीसदी गिर चुका है। सेंसेक्स शुक्रवार को 2.19 फीसदी गिरकर 17,305.87 पर बंद हुआऔरऔर भी

साल 2008 और 2009 में बाजार लेहमान संकट की भेंट चढ़ गया। अब 2011 पर यूरोप व अमेरिका का ऋण संकट मंडरा रहा है। अमेरिका की आर्थिक विकास दर के अनुमान को घटाकर 1 फीसदी कर दिया गया है। अमेरिका के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ कि स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने शनिवार को उसकी रेटिंग एएए के सर्वोच्च स्तर से घटाकर एए+ कर दी और आगे एए भी कर सकती है। हालांकि अमेरिकी वित्त मंत्रालयऔरऔर भी

शेयरों में निवेश कोई घाटा खाने या कंपनियों से रिश्तेदारी निभाने के लिए नहीं करता। अभी हर तरफ गिरावट का आलम है, अच्छे खासे सितारे टूट-टूटकर गिर रहे हैं तो ऐसे में क्या करना चाहिए? जो वाकई लंबे समय के निवेशक हैं, रिटायरमेंट की सोचकर रखे हुए हैं, उनकी बात अलग है। लेकिन अनिश्चितता से भरे इस दौर में शेयर बाजार में लांग टर्म निवेश का क्या सचमुच कोई मतलब है? लोगबाग दुनिया के मशहूर निवेशक वॉरेनऔरऔर भी

अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह की कंपनी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज का शेयर गिरता ही चला जा रहा है। इस साल जनवरी में 195.90 रुपए पर था। अभी 151 रुपए पर है, साल भर पहले 25 अगस्त 2010 को हासिल न्यूनतम स्तर 149 रुपए के करीब। जो रुझान है उसमें हो सकता है कि नया न्यूनतम स्तर ही बन जाए। किया क्या जाए? जिनके पास हैं, वे क्या करें और जिनके पास नहीं हैं, वे क्या करें। कंपनी यकीननऔरऔर भी

टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज। आईआईटी मुंबई के दो इंजीनियरों द्वारा 1972 में बनाई गई कंपनी। भारत सरकार से मान्यता प्राप्त 3-स्टार एक्सपोर्ट हाउस। 95 फीसदी आय निर्यात से। दुनिया भर में ड्रम क्लोजर की दूसरी सबसे बड़ी निर्माता। अमेरिका से लेकर जर्मनी व चीन तक विस्तार। शेयर का भाव 52 हफ्तों की तलहटी 45.45 रुपए पर। बंद हुआ 45.95 रुपए पर, जबकि बुक वैल्यू ही है 131.45 रुपए। कंपनी का ठीक पिछले बारह महीनों का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ)औरऔर भी

आंध्रा पेट्रोकेमिकल्स ने दो दिन ही पहले जबरदस्त नतीजे घोषित किए हैं। उसने चालू वित्त वर्ष 2011-12 की पहली तिमाही में 157.22 करोड़ रुपए की बिक्री पर 12.68 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है, जबकि साल भर पहले जून 2010 की तिमाही में उसने 72.96 करोड़ रुपए की बिक्री पर 4.31 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ ही कमाया था। हालांकि दोनों नतीजों की तुलना नहीं हो सकती क्योंकि पिछले साल संयंत्र के क्षमता विस्तार व आधुनिकीकरणऔरऔर भी

हर दिन 52 हफ्तों का पहला या आखिरी दिन होता है और हर दिन कोई कंपनी 52 हफ्ते का शिखर बनाती है तो कोई कंपनी 52 हफ्ते के रसातल पर चली जाती है। तो क्यों न हम रसातल में जानेवाली कंपनियों से कुछ समय के लिए ध्यान हटाकर उन कंपनियों पर लगाएं तो अपनी संभावनाओं के दम पर इस पस्त बाजार में भी सीना तानकर बढ़ी जा रही हैं। ऐसी ही एक कंपनी है कार्बोरनडम यूनिवर्सल। उसकेऔरऔर भी

अजंता फार्मा देश की दवा कंपनियों में धंधे के लिहाज 63वें नंबर पर है। छोटी कंपनी है। कुल बाजार पूंजीकरण 410 करोड़ रुपए का है। लेकिन काम जबरदस्त कर रही है। बीते हफ्ते गुरुवार, 28 जुलाई को उसने जून 2011 की तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं। इनके मुताबिक इन तीन महीनों में उसकी बिक्री पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 29.52 फीसदी बढ़कर 98.29 करोड़ रुपए से 127.31 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 79.51औरऔर भी

शेयर तो हर कोई, जिसके पास भी डीमैट खाता है, आसानी से खरीद सकता है। लेकिन शेयरों से कमाई वही कर पाता है जो सही वक्त पर उन्हें बेच लेता है। ज्यादातर लोग तो हाथ ही मलते रह जाते हैं कि उस समय कितने टॉप पर गया था मेरा शेयर। काश, उस समय बेच लिया होता! मुश्किल यह है कि खरीदने की सलाह तो जगह-जगह से मिल जाती है। ब्रोकरों से लेकर हॉट टिप्स बांटनेवाली वेबसाइट्स औरऔरऔर भी

सीधी रेखा नहीं, लहरों की तरह चलते हैं शेयरों के भाव। 4 अक्टूबर 2010 को हमने पहली बार जब यूं ही चलते-चलते ग्लेनमार्क फार्मा का जिक्र छेड़ा था, तब यह 311.70 रुपए पर था। करीब दो महीने बाद 7 दिसंबर 2010 को 389.75 रुपए के शिखर पर चला गया। लेकिन करीब ढाई महीने बाद ही 28 फरवरी 2011 को 241.60 रुपए की घाटी में जा गिरा। अभी 16 मई 2011 को हमारे चक्री भाई ने जब इसेऔरऔर भी