इंसानों की इस दुनिया में भगवान की तलाश बड़ी रिस्की है। न जाने किस भेष में भगवान नहीं, कोई शैतान या महाठग मिल जाए! फिर, जब सब कुछ अपने ज्ञान, कर्म और नेटवर्किंग से मिलना है तो ऐसा संगीन रिस्क उठाने में फायदा ही क्या।  और भीऔर भी

जिंदगी में अनिश्चितता है तो बदलाव भी शाश्वत है। फिर भी हम निरंतर निश्चितता व स्थायित्व की तलाश में लगे रहते हैं। हमारी चाहत व हकीकत के बीच संघर्ष निरंतर चलता है। तभी एक दिन हम निश्चित मृत्यु तक पहुंचकर मिट जाते हैं।और भीऔर भी

दुनिया जंगल है और उसकी सारी राहें पत्तों से ढंकी हैं। बड़े होते ही मां-बाप का हाथ छोड़ राह की तलाश में जुट जाते हैं। सच्चा गुरु मिला तो मिल जाती है मंजिल। नहीं तो ताज़िंदगी भटकते रह जाते है।और भीऔर भी