खाद्य मुद्रास्फीति का बढ़ना और हमारे वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का चिंतित होना लगता है जैसे अब अनुष्ठान बन गया है। 24 सितंबर को खत्म हफ्ते में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 9.41 फीसदी पर पहुंच गई। इसके जारी होने के बाद वित्त मंत्री ने कहा कि यह निश्चित तौर पर चिंता का कारण है। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक फल, सब्जी, दूध व अंडा, मांस-मछली की कीमत में तेजी के चलते 24औरऔर भी

केंद्र सरकार चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में बाजार से 2.20 लाख करोड़ रुपए उधार जुटाएगी। यह बजट में तय की गई रकम से 52,872 करोड़ रुपए ज्यादा है। सरकार के इस फैसने ने बांड बाजार में सिहरन दौड़ा दी है और माना जा रहा है कि इससे निजी क्षेत्र के लिए वित्तीय संसाधन कम पड़ जाएंगे। सरकार का कहना है कि लघु बचत से कम रकम मिलने और केंद्र का कैश बैलेंस कम होने केऔरऔर भी

भारत अगर 12वीं पंचवर्षीय योजना में सालाना 9 फीसदी आर्थिक विकास दर हासिल कर लेता है तो यह काफी है। इससे ज्यादा विकास दर हासिल करने का प्रयास अर्थव्यवस्था पर बुरा असर ड़ाल सकता है। यह मानना है प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन व रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन का। रंगराजन गुरुवार को राजधानी दिल्ली में भारतीय आर्थिक सेवा (आईईएस) के स्वर्ण जयंती समारोह में बोल रहे थे। आर्थिक सेवा अधिकारियों को संबोधितऔरऔर भी

कल बाजार ने ज्यादा गिरावट को संभाल लिया और आज सुबह से बढ़ना शुरू हुआ तो लगातार बढ़ता ही गया। आज निफ्टी 2.81 फीसदी बढ़कर 4971.25 और सेंसेक्स 2.95 फीसदी बढ़कर 16,524.03 पर बंद हुआ। भारतीय शेयर बाजार के इस बर्ताव में जबरदस्त अचंभे का तत्व है जिसे देखने-समझने की जरूरत है। मैं आपको बताता रहा हूं कि अभी के दौर में बाजार का आगे बढ़ना बेहद मुश्किल है क्योंकि दुनिया के बाजारों के साथ ही भारतीयऔरऔर भी

भारतीय रुपया शुक्रवार को डॉलर के सापेक्ष कमजोर होकर 49.825 रुपए तक चला गया। लेकिन बाद में 49.50 रुपए पर आकर थम गया। रिजर्व बैंक की संदर्भ दर आज डॉलर के सापेक्ष 49.663 रुपए रही। जानकारों का कहना है कि रिजर्व बैंक अगर बाजार में डॉलर नहीं बेचता तो रुपए की विनिमय दर कभी भी 50 रुपए के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर सकती है। लेकिन रिजर्व बैंक फिलहाल ऐसे किसी भी हस्तक्षेप के लिए तैयार नहींऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने न केवल ब्याज दरें एक बार फिर बढ़ा दीं, बल्कि अब भी इसी रुख पर कायम है कि मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के लिए वह आगे भी ऐसा कर सकता है। व्यावहारिक रूप से देखें तो ब्याज दरें बढ़ाकर मुद्रास्फीति को रोकने की सीमा और समय, दोनों ही अब समाप्त हो चुका है। वैसे भी बेहद कम गुंजाइश है कि दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाई जाएंगी क्योंकि तब तक अच्छे मानसून का असर सामनेऔरऔर भी

वित्त मंत्रालय से लेकर पूरी सरकार को चिंता सताए जा रही है कि कहीं ब्याज दरें बढ़ने से देश की आर्थिक व औद्योगिक विकास दर और धीमी न पड़ जाए। इसलिए वे चाहते थे कि ब्याज दरें अब न बढ़ाई जाएं। लेकिन ऊपर-ऊपर मंत्री से लेकर सलाहकार तक रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर बढ़ाने का समर्थन कर रहे हैं। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने रिजर्व बैंक द्वारा शुक्रवार को रेपो व रिवर्स रेपो दरों में 0.25 फीसदीऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने एक बार फिर वही किया। ब्याज दर बढ़ाकर मुद्रास्फीति को थामने का आक्रामक अंदाज बनाए रखा। इससे तो यही लगता है कि मंदड़िए फिर से हमला करने की कोशिश करेंगे क्योंकि पिछले दो दिनों वे अपनी शॉर्ट पोजिशन काट चुके हैं। फिर भी बाजार का मिजाज कुल मिलाकर धीरे-धीरे तेजी का होता जा रहा है। अब तो निफ्टी के 4000 या इससे भी नीचे जाने की भविष्यवाणी करनेवाले एनालिस्ट भी अपनी राय बदलकर गिरनेऔरऔर भी

भारत के फाइनेंस जगत की सबसे बड़ी खबर। लेकिन निकली एकदम ठंडी। पिछली बार 26 जुलाई को अपेक्षा के विपरीत ब्याज दर को 0.50 फीसदी बढ़ाकर सबको चौंका देना एक अपवाद था। अन्यथा रिजर्व बैंक गवर्नर डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव का एक खास अंदाज है। वे नीतिगत उपायों से चौंकानेवाला तत्व एकदम खत्म कर देना चाहते हैं। यह देश के केंद्रीय बैंक के कामकाज में पारदर्शिता लाने के उनके प्रयास का हिस्सा है। आज सुबह तक सबको पक्काऔरऔर भी