रुपए में कमजोरी का सिलसिला जारी है। डॉलर के सापेक्ष उसकी विनियम दर सोमवार को दोपहर तीन बजे के आसपास 1/52 रुपए से नीचे चली गई। 5 मार्च 2009 के बाद पहली बार रुपया इतना नीचे गिरा है। शाम पांच बजे तक एमसीएक्स एसएक्स में एक डॉलर की दर 52.27 रुपए हो गई, वहीं दिसंबर फ्यूचर्स का भाव 52.50 रुपए रहा है। अगर बाजार की मानें तो जून 2012 तक डॉलर/रुपए की विनिमय दर 53.20 रुपए होऔरऔर भी

इसे बढ़ी हुई ब्याज दरों का असर कहें या औद्योगिक सुस्ती का नतीजा, लेकिन आंकड़े गवाह हैं कि इस साल औद्योगिक क्षेत्र को बैंकों से मिले ऋण में अभी तक पिछले साल के मुकाबले 55,138 करोड़ रुपए कम बढ़त हुई है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में 4 नवंबर तक बैंकों द्वारा दिया गया गैर-खाद्य ऋण या दूसरे शब्दों में मैन्यूफैक्चरिंग व उपभोक्ता क्षेत्र को दिया गया ऋण 2,25,211 करोड़ रुपए बढ़ा है, जबकि बीते वित्त वर्ष 2010-11औरऔर भी

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इस समय देश के भीतर और दुनिया के वित्तीय बाजारों में जैसी अनिश्चितता चल रही है, उसकी वजह से भारतीयों ने शेयर बाजार में निवेश बेहद घटा दिया है। वैश्विक स्तर की निवेश व सलाहकार फर्म मॉरगन स्टैनले की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक चालू साल 2011 में भारतीय लोगों ने अपनी कुल आस्तियों का बमुश्किल 4 फीसदी इक्विटी बाजार में लगा रखा है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले चालीस सालों में इतना कम निवेश केवल दोऔरऔर भी

अक्टूबर माह में सकल मुद्रास्फीति की दर उम्मीद से बदतर ही रही है। माना जा रहा था कि शायद इसमें कुछ कमी आएगी। लेकिन सोमवार को केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 9.73 फीसदी रही है। यह सितंबर में 9.72 फीसदी थी। नोट करने की बात है कि लगातार पिछले ग्यारह महीनों से मुद्रास्फीति की दर नौ फीसदी से ज्यादा चल रही है।औरऔर भी

पिछले बीस महीनों से कसते ब्याज दर के फंदे ने भले ही मुद्रास्फीति का बालबांका न किया हो, लेकिन औद्योगिक विकास का गला जरूर कस दिया है। खदानों, फैक्टरियों और सेवा क्षेत्र से मिले ताजा आंकड़ों के अनुसार औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में मात्र 1.81 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि जानकारों का औसत अनुमान 3.5 फीसदी का था। यह सितंबर 2009 के बाद पिछले दो सालों की न्यूनतम औद्योगिक वृद्धि दर है। सितंबर 2010 में आईआईपीऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति की दर में हल्की-सी कमी जरूर आई है। लेकिन यह अब भी दहाई अंक में बनी हुई है। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य मुद्रास्फीति की दर 29 अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह में 11.81 फीसदी रही है। इससे ठीक पिछले हफ्ते में इसकी दर 12.21 फीसदी दर्ज की गई थी। दाल, सब्जियों, दूध व मांस, मछली की कीमतों का बढ़ना जारी रहा। अक्टूबर के चार हफ्चोंऔरऔर भी

रिजर्व बैंक गवर्नर डी सुब्बाराव का मानना है कि मुद्रास्फीति पर काबू पाना न केवल निकट भविष्य में, बल्कि लंबे समय में भी आर्थिक विकास की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है। इसी सोच के तहत उन्होंने मौद्रिक नीति की दूसरी तिमाही समीक्षा में पंचों की राय के मुताबिक ब्याज दरों को 0.25 फीसदी बढ़ा दिया। अब तत्काल प्रभाव से रेपो दर बढ़कर 8.50 फीसदी हो गई है। इसके अनुरूप रिवर्स रेपो दर 7.50 फीसदीऔरऔर भी

इक्कीस साल एक महीने पहले सितंबर 1990 से देश में बैंकों की ब्याज दरों को बाजार शक्तियों या आपसी होड़ के हवाले छोड़ देने का जो सिलसिला हुआ था, वह शुक्रवार 25 अक्टूबर 2011 को रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की दूसरी तिमाही समीक्षा के साथ पूरा हो गया। रिजर्व बैंक के गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव ने ऐलान किया, “अब वक्त आ गया है कि आगे बढ़कर रुपए में ब्याज दर को विनियंत्रित करने की प्रकिया पूरी करऔरऔर भी