नेता, काला धन और शेयर बाज़ार
हमारे नेतागण काले धन को सफेद बनाने में बड़े उस्ताद हैं। वे अमूमन बीएसई में लिस्टेड किसी मरियल-सी कंपनी के शेयर खरीदते हैं जिसके सारे शेयर कुछ गिनेचुने ऑपरेटरों के पास होते हैं। मसलन, इसी साल जुलाई में महाराष्ट्र के एक प्रमुख राजनेता ने अपनी पत्नी और बेटे के नाम एक कंपनी के 50 लाख शेयर खरीदे। उन्हें यह शेयर 2 रुपए के भाव पर वरीयता आधार पर दिए गए। तब शेयर का भाव 3.70 रुपए चलऔरऔर भी
हाईटाइड के वक्त रहें समुंदर से दूर
कल शाम एक समझदार और अपेक्षाकृत ईमानदार ब्रोकर (क्योंकि ज्यादातर ब्रोकर केवल अपने धंधे के प्रति ईमानदार होते हैं, हमारे प्रति नहीं) से बात हो रही है। उनका कहना था कि हर समय हर किसी के लिए ट्रेड करने का नहीं होता। जैसे, इस समय जितनी वोलैटिलिटी चल रही है, निफ्टी दिन में अक्सर 200-250 अंक ऊपर नीचे होने लगा है, उसे देखते हुए हमें मैदान बड़ों के लिए छोड़ देना चाहिए। नहीं तो हम पिस जाएंगेऔरऔर भी
पिटता रुपया और हंसता काला धन
रिजर्व बैंक ठान ही चुका है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा तो स्वाभाविक रूप से रुपए का बेरोकटोक गिरना जारी है। डॉलर के सापेक्ष अब तक वह 56 रुपए के करीब पहुंच चुका है। हो सकता है कि कल तक एकदम 56 भी हो जाए। तब रुपए को हीरो बनाकर नई फिल्म बनेगी जिसका शीर्षक होगा – अब तक छप्पन। खैर, तीखी गिरावट ने हमें इस समय एकदम तलहटी के करीब पहुंचाऔरऔर भी
खेल भावनाओं का
कितना अजीब है कि जो भावनाओं से हीन हैं, वे हम सबकी भावनाओं से खेलते हैं। नेता से अभिनेता और कॉपीराइटर तक। पर जो भावनाओं से भरे हैं, उनमें शहादत का भाव तो लबालब है, सीखने का सब्र नहीं।और भीऔर भी






